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हुजूर देखिए शिक्षा विभाग की हालत, नौनिहालों की थाली पर अफसर गड़ाए हैं गिद्ध नजर! सबकुछ कर जा रहे हजम,कार्रवाई के नाम पर चार महीने से खानापूर्ति

Bihar Education Dept: मोतिहारी में सरकार की महत्वाकांक्षी मध्याह्न भोजन योजना पर एनजीओ और शिक्षा विभाग के अफसरों की कथित मिलीभगत का साया मंडराता नजर आ रहा है।

Motihari MDM Scam Eggs Vegetables Vanish Officials Look Away
नौनिहालों की थाली पर एनजीओ और शिक्षा विभाग के अफसरों की गिद्ध नजर!- फोटो : reporter

Motihari: सरकार की महत्वाकांक्षी मध्याह्न भोजन योजना पर एनजीओ और शिक्षा विभाग के अफसरों की कथित मिलीभगत का साया मंडराता नजर आ रहा है। जिस थाली में नौनिहालों को पौष्टिक आहार मिलना चाहिए, वहां कभी कीड़ा युक्त भोजन मिलने का मामला सामने आ रहा है तो कभी मेनू से अंडा और सब्जी गायब होने की शिकायतें उठ रही हैं। आरोप है कि बच्चों के निवाले पर डाका डालकर एनजीओ से लेकर जिम्मेदार अधिकारी तक मालामाल हो रहे हैं और कार्रवाई के नाम पर महज खानापूर्ति की जा रही है।

मोतीहारी के अरेराज प्रखंड के कई विद्यालयों में एमडीएम की गुणवत्ता सवालों के घेरे में है। उत्क्रमित मध्य विद्यालय जनेरवा में अप्रैल में कीड़ा युक्त अंडा मिलने के बाद जमकर हंगामा हुआ था। मामले की गंभीरता को देखते हुए अरेराज एसडीओ सह प्रशिक्षु आईएएस अंजली शर्मा ने मौके पर पहुंचकर एमडीएम की जांच की थी। जांच के दौरान अंडे में कीड़ा मिलने, भोजन व्यवस्था में कथित अनियमितता और विद्यालय में छात्रों की अधिक उपस्थिति दर्ज किए जाने का मामला सामने आया।

इसके बाद एनजीओ और विद्यालय के प्रधानाध्यापक पर कार्रवाई की अनुशंसा करते हुए शिक्षा विभाग को रिपोर्ट भेजी गई। शिक्षा विभाग ने तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित की। कमेटी की जांच में अंडे में कीड़ा मिलने की पुष्टि के साथ यह भी सामने आया कि निर्धारित व्यवस्था के अनुरूप सभी विद्यालयों में अंडा नहीं दिया जा रहा था। कुछ विद्यालयों में अंडे की जगह महज एक-एक केला देकर राशि के गबन का आरोप भी सामने आया।

लेकिन सवाल यह है कि इतनी गंभीर गड़बड़ी सामने आने के बावजूद कार्रवाई कितनी हुई? आरोप है कि जांच रिपोर्ट के बाद सिर्फ एक दिन की एमडीएम राशि काटकर मामले को रफा-दफा करने की कोशिश की गई। यानी बच्चों की थाली से कथित तौर पर निवाला गायब करने वालों पर शिकंजा कसने के बजाय कार्रवाई की रस्म अदायगी कर दी गई।

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स्थानीय स्तर पर यह भी आरोप है कि मेनू में निर्धारित मिश्रित दाल और सब्जी की जगह घटिया विकल्प परोसे जाते हैं। बच्चों के हिस्से का अंडा और सब्जी आखिर कहां गायब हो रही है, यह बड़ा सवाल है। यदि जांच में अनियमितताओं की पुष्टि हुई है तो जिम्मेदार एनजीओ और अधिकारियों की जवाबदेही तय करना जरूरी है।

नौनिहालों की थाली किसी की कमाई का जरिया नहीं, बल्कि उनके अधिकार और सरकार की जिम्मेदारी है। ऐसे में चार महीने बाद भी यदि कार्रवाई फाइलों में अटकी है तो शिक्षा विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठना लाजिमी है। अब देखना होगा कि विभाग खानापूर्ति से आगे बढ़कर दोषियों पर वास्तविक कार्रवाई करता है या बच्चों के हक पर कथित डाका यूं ही जारी रहता है।

रिपोर्ट- हिमांशु कुमार