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निजी स्कूलों की 'दुकानदारी' बंद! डीएम का बड़ा फैसला, अब किताबें और ड्रेस कहीं से भी खरीद सकेंगे अभिभावक

जिला प्रशासन ने निजी स्कूलों द्वारा अभिभावकों के आर्थिक शोषण को रोकने के लिए एक बड़ा और कड़ा कदम उठाया है। जिलाधिकारी (DM) सौरभ जोरवाल ने निजी विद्यालयों की मनमानी पर लगाम कसते हुए तत्काल प्रभाव से प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किए हैं।

निजी स्कूलों की 'दुकानदारी' बंद! डीएम का बड़ा फैसला, अब किता

Motihari - : पूर्वी चंपारण के जिलाधिकारी सौरभ जोरवाल ने जिले के निजी स्कूलों द्वारा यूनिफॉर्म, किताबों और स्टेशनरी के नाम पर की जा रही अवैध वसूली और मनमानी के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। डीएम ने पाया कि स्कूल संचालक और स्टेशनरी/यूनिफॉर्म विक्रेता आपसी सांठगांठ कर सामग्री की अत्यधिक कीमतें वसूल रहे हैं। इस शोषणकारी व्यवस्था के कारण विशेष रूप से गरीब अभिभावकों पर भारी आर्थिक बोझ पड़ रहा था और समाज में असंतोष की स्थिति बन रही थी।

धारा-163 के तहत सख्त प्रतिबंधात्मक आदेश

 इन गंभीर परिस्थितियों को देखते हुए जिलाधिकारी ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा-163 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए तत्काल प्रभाव से कड़े निर्देश जारी किए हैं। अब कोई भी स्कूल संचालक या प्राचार्य विद्यार्थियों को किसी एक ही निर्धारित दुकान या विक्रेता से किताबें, जूते या यूनिफॉर्म खरीदने के लिए बाध्य नहीं कर सकेगा। अभिभावकों को अब खुले बाजार से प्रतिस्पर्धी कीमतों पर सामान खरीदने की पूरी स्वतंत्रता होगी।

पारदर्शिता के लिए निर्धारित की गई शर्तें 

प्रशासन ने स्कूलों के लिए पारदर्शिता सुनिश्चित करने हेतु निम्नलिखित शर्तें अनिवार्य कर दी हैं:

  • सूची का प्रदर्शन: सभी निजी स्कूलों को 10 फरवरी 2026 तक अपनी वेबसाइट और स्कूल के सार्वजनिक सूचना पट्ट पर अनिवार्य पुस्तकों और यूनिफॉर्म का पूरा विवरण चस्पा करना होगा।

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    यूनिफॉर्म में स्थायित्व: स्कूल प्रशासन को यूनिफॉर्म का निर्धारण इस प्रकार करना होगा कि उसमें कम से कम तीन वर्षों तक कोई बदलाव न हो, ताकि अभिभावकों को बार-बार नए ड्रेस न खरीदने पड़ें।

  • समय सीमा: यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होकर 30 अप्रैल 2026 तक जिले में प्रभावी रहेगा।

उल्लंघन करने पर होगी जेल और कठोर कार्रवाई 

डीएम ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि आदेश का उल्लंघन करने वाली संस्था या व्यक्ति के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा-223 के तहत विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी। यदि किसी स्कूल में आदेश की अवहेलना पाई जाती है, तो स्कूल के प्राचार्य, संचालक, प्रबंधक और बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स के सभी सदस्य व्यक्तिगत रूप से उत्तरदायी माने जाएंगे। जिले के सभी एसडीओ (SDO), बीडीओ (BDO) और बीईओ (BEO) को इन आदेशों के कड़ाई से पालन और निरंतर निगरानी का निर्देश दिया गया है।