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Bihar News : मोतिहारी में मनरेगा का 'अजूबा कारनामा', बिना सड़क के ही बना दी गयी एक दर्जन पुलिया, प्रशासनिक महकमें में मचा हड़कंप

Bihar News : बिहार का पहला जिला बनेगा मोतीहारी जहाँ अधिकारी और जनप्रतिनिधि के मिलीभगत से अजूबा कारनामा करने में महारत हासिल किया है.......पढ़िए आगे

Bihar News : मोतिहारी में मनरेगा का 'अजूबा कारनामा', बिना सड
बिना सड़क बन गयी पुलिया - फोटो : HIMANSHU

MOTIHARI : बिहार का पूर्वी चंपारण जिला इन दिनों प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की कथित मिलीभगत से हुए एक अनोखे कारनामे को लेकर चर्चा में है। जिले के केसरिया और पताही प्रखंड में बिना किसी रास्ते या सड़क के ही करीब एक दर्जन पुलिया का निर्माण कर सरकारी राशि के गबन का एक बड़ा मामला सामने आया है। पहले केसरिया प्रखंड में नदी के बीचों-बीच पुलिया बनाने का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ था कि अब पताही प्रखंड में भी बिना सड़क के खेतों में बनी आधा दर्जन पुलिया का वीडियो और फोटो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस अजीबोगरीब घोटाले को देखकर आम जनता सोशल मीडिया पर चुटकी लेते हुए लिख रही है कि "बिहार में कुछ भी संभव है।"

मामले की शुरुआत मोतिहारी के केसरिया प्रखंड से हुई, जहाँ ढेकहा पंचायत के वार्ड संख्या 04 और 11 में गंडक नदी की पेटी के अंदर बिना किसी रास्ते के आधा दर्जन पुलिया खड़ी कर दी गईं। नदी के बीचों-बीच बनी इन बेमतलब पुलियाओं के जरिए सरकारी खजाने पर डाका डालने का मामला जैसे ही सुर्खियों में आया, प्रशासनिक महकमे में खलबली मच गई। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस घोटाले के उजागर होने के बाद से ही वरीय अधिकारी मामले की जांच करने के बजाय इस पर पर्दा डालने और लीपापोती करने की कोशिशों में जुटे हुए हैं।

केसरिया प्रखंड का मामला अभी ठंडा भी नहीं पड़ा था कि पताही प्रखंड के पूर्वी पंचायत से भी ऐसा ही एक और हैरान करने वाला मामला सामने आ गया। यहाँ के सरेह में बिना किसी एप्रोच रोड या संपर्क मार्ग के ही मनरेगा योजना के तहत आधा दर्जन पुलिया बनाकर लाखों रुपये की सरकारी राशि का दुरुपयोग किया गया है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही तस्वीरों और वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि चारों तरफ सिर्फ खेत हैं और उनके बीच में बिना उपयोग के ये घटिया पुलिया खड़ी हैं। दावों के मुताबिक, पिछले दो वर्षों से ये पुलिया इसी तरह लावारिस स्थिति में पड़ी हैं और इनके नाम पर भारी-भरकम राशि का उठान कर लिया गया है।

इस अजूबे कारनामे के सामने आने के बाद अब सरकारी कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। लोग सोशल मीडिया पर लगातार यह सवाल पूछ रहे हैं कि आखिर बिना किसी धरातलीय सड़क के विभागीय अधिकारियों ने इस योजना को स्वीकृति कैसे दे दी? सबसे बड़ा सवाल कनीय अभियंता और सहायक अभियंता की भूमिका पर है कि उन्होंने बिना स्थल निरीक्षण किए ही इस कार्य की मापी पुस्तिका को कैसे दर्ज और स्वीकृत कर दिया? स्थानीय नागरिकों का कहना है कि मनरेगा योजना के तहत जनप्रतिनिधियों और भ्रष्ट अधिकारियों को सरकारी धन लूटने की खुली आजादी मिल गई है, जिसके चलते विकास के नाम पर इस तरह का मज़ाक किया जा रहा है।

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सरेह में बिना सड़क के पुलिया निर्माण का यह विवाद अब तूल पकड़ चुका है और इसकी गूंज स्थानीय विधायक तक भी पहुँची है। इस संबंध में जब पताही मनरेगा के कार्यक्रम पदाधिकारी से दूरभाष पर संपर्क किया गया, तो उन्होंने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि उन्हें बिना सड़क के पुलिया निर्माण की शिकायत प्राप्त हुई थी। शुरुआती स्थल निरीक्षण के दौरान दो ऐसी पुलिया मिली हैं, जिनका निर्माण बिना किसी रास्ते के किया गया है। पीओ ने यह भी स्वीकार किया कि विधायक द्वारा भी इस लापरवाही की शिकायत दर्ज कराई गई है। उन्होंने आश्वासन दिया है कि दो दिनों के भीतर पूरे मामले की गहन जांच कर रिपोर्ट तैयार की जाएगी और दोषियों पर कार्रवाई होगी।

हिमांशु की रिपोर्ट