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शराबबंदी में 'माल' की डिमांड: मधुबनी के नशेड़ी दारोगा पर गिरी गाज, जेल जाने की भी तैयारी

मधुबनी जिले के बिस्फी थाने में तैनात एक दारोगा, कमलेश राम का एक ऑडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। ऑडियो में दारोगा शराब के नशे में धुत सुनाई दे रहा है, वह एक युवक को जेल भेजने की धमकी देकर खुलेआम शराब की मांग कर रहा है।

Mdhubani Bisphi Police demanding illegal liquor goes viral p
शराबबंदी में 'माल' की डिमांड: मधुबनी के नशेड़ी दारोगा पर गिरी गाज, जेल जाने की भी तैयारी - फोटो : news 4 nation

बिहार के मधुबनी जिले के बिस्फी थाने में तैनात एक दारोगा, कमलेश राम का एक बेहद आपत्तिजनक ऑडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस ऑडियो में दारोगा न केवल शराब के नशे में धुत सुनाई दे रहा है, बल्कि वह एक युवक को जेल भेजने की धमकी देकर खुलेआम शराब की मांग कर रहा है। वीडियो रिपोर्ट के अनुसार, दारोगा के सिर पर वर्दी और शराब का नशा इस कदर हावी है कि वह बातचीत के दौरान मर्यादा की सारी सीमाएं लांघता नजर आ रहा है। वायरल ऑडियो  में डायल-112 में तैनात पुलिस अवर निरीक्षक (पु०अ०नि०) कमलेश राम कथित तौर पर एक व्यक्ति से अवैध शराब की मांग करते नजर आ रहे हैं। यह वीडियो 3 मार्च 2026 का बताया जा रहा है, जो 10 मार्च को सोशल मीडिया के जरिए वरिष्ठ अधिकारियों के संज्ञान में आया। मामले की गंभीरता को देखते हुए मधुबनी पुलिस अधीक्षक योगेंद्र कुमार ने तुरंत संज्ञान लिया और आरोपी अधिकारी पर कार्रवाई के आदेश दिए।

जांच में पुष्ट हुई अनुशासनहीनता और निलंबन

 पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर बेनीपट्टी के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी ने इस मामले की गहन जांच की। जांच रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ कि वीडियो में पुलिस अधिकारी का कृत्य विभाग की गरिमा, पारदर्शिता और अनुशासन के पूरी तरह विरुद्ध है। इसके आधार पर पु०अ०नि० कमलेश राम को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। विभाग ने उनके खिलाफ विभागीय अनुशासनिक कार्रवाई भी शुरू कर दी है, जिसे पुलिस महकमे में अनुशासन बनाए रखने की दिशा में एक सख्त कदम माना जा रहा है।

FIR दर्ज और कानूनी शिकंजा

 निलंबन के साथ-साथ अब यह मामला कानूनी कार्यवाही की ओर बढ़ गया है। पु०अ०नि० कमलेश राम और उनके साथ संलिप्त सुंदर लाल यादव के खिलाफ बिहार मद्य निषेध एवं उत्पाद अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत नामजद प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई है। पुलिस ने मामले का औपचारिक अनुसंधान शुरू कर दिया है और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। यह कार्रवाई स्पष्ट करती है कि शराबबंदी वाले राज्य में कानून तोड़ने वालों को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वे वर्दी में ही क्यों न हों।

विभाग का कड़ा संदेश और भ्रष्टाचार पर प्रहार 

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पुलिस अधीक्षक योगेंद्र कुमार ने इस मामले के जरिए पूरे महकमे को स्पष्ट संदेश दिया है कि विभाग के भीतर किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि या अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि कोई भी पुलिसकर्मी कानून की रक्षा करने के बजाय उसका उल्लंघन करता पाया जाता है, तो उसके विरुद्ध कठोरतम कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पूरे मामले की विस्तृत जांच जारी है ताकि इस सिंडिकेट से जुड़े अन्य पहलुओं का भी खुलासा हो सके।