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भोलेनाथ का कैदी बनकर निकला शिवभक्त, जंजीरों में बंधे कदमों से वैद्यनाथ धाम की अनोखी यात्रा

Shravani Mela:एक शिवभक्त स्वयं को भोलेनाथ का कैदी बताते हुए लोहे की जंजीरों में बंधकर बाबा वैद्यनाथ धाम की यात्रा कर रहा है।...

Devotee Walks Chained to Baidyanath Dham in Unique Shiva Vow
महादेव का कैदी बनकर निकला शिवभक्त- फोटो : reporter

Shravani Mela:  श्रावण मास में भगवान शिव की आराधना के लिए लाखों श्रद्धालु सुल्तानगंज से पवित्र गंगाजल लेकर बाबा वैद्यनाथ धाम की यात्रा करते हैं। कोई कांवर लेकर पैदल चलता है, कोई वाहन से तो कोई दंडवत प्रणाम करते हुए कठिन तपस्या का मार्ग अपनाता है। किंतु इस बार खगड़िया से एक ऐसी अनूठी शिवभक्ति देखने को मिली, जिसने कांवर पथ पर हर किसी का ध्यान आकर्षित कर लिया। एक शिवभक्त स्वयं को भोलेनाथ का कैदी बताते हुए लोहे की जंजीरों में बंधकर बाबा वैद्यनाथ धाम की यात्रा कर रहा है।

श्रद्धालु का कहना है कि उसे स्वप्न में भगवान भोलेनाथ के दर्शन हुए। उसके अनुसार, स्वप्न में महादेव ने कहा कि "तुमसे पाप हुआ है, स्वयं को जंजीरों में बांधकर मेरे धाम आओ।" इसी दिव्य आदेश को जीवन का संकल्प मानकर वह स्वयं को जंजीरों से आबद्ध कर बाबा के दरबार की ओर अग्रसर है। उसका विश्वास है कि यह यात्रा आत्मशुद्धि, प्रायश्चित और शिवकृपा प्राप्ति का माध्यम है।शिवभक्त का कहना है कि "हर पीड़ा का एकमात्र उपचार बाबा भोलेनाथ हैं। जब जीवन में संकट आता है तो महादेव ही मार्ग दिखाते हैं। मैं स्वयं को उनका अपराधी मानकर कैदी के रूप में उनके दरबार में उपस्थित होने जा रहा हूं।"

कांवर पथ पर जंजीरों में बंधे इस शिवभक्त को देखकर राहगीर और अन्य श्रद्धालु भी आश्चर्यचकित हो रहे हैं। अनेक श्रद्धालु उसकी अटूट आस्था और दृढ़ संकल्प की प्रशंसा कर रहे हैं। गया, बेगूसराय और आसपास के क्षेत्रों से आए कांवरियों का कहना है कि भगवान भोलेनाथ अपने भक्तों की परीक्षा भी लेते हैं और सच्ची श्रद्धा रखने वालों की मनोकामनाएं भी पूर्ण करते हैं।

शिवभक्त का कहना है, "जीवन की हर पीड़ा का एकमात्र समाधान बाबा भोलेनाथ हैं। जब भी इंसान संकट में पड़ता है, महादेव ही उसे सही मार्ग दिखाते हैं। मैं स्वयं को उनका अपराधी मानते हुए 'भोलेनाथ का कैदी' बनकर उनके दरबार में प्रायश्चित और क्षमा याचना के लिए जा रहा हूं।"श्रावणी यात्रा केवल आस्था का पर्व नहीं, बल्कि त्याग, तप, संयम और आत्मसमर्पण का भी महापर्व है। कोई नंगे पांव चलता है, कोई दंडवत यात्रा करता है और कोई अपने संकल्प को जंजीरों में बांधकर पूर्ण करता है। खगड़िया के इस शिवभक्त की अनोखी यात्रा एक बार फिर यह संदेश देती है कि शिवभक्ति में आडंबर नहीं, अटूट विश्वास और समर्पण ही सबसे बड़ी साधना है।

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रिपोर्ट- अमित कुमार