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Bihar Flood: गंगा-महानंदा का कहर, डेंजर लेवल से 43 सेंटीमीटर ऊपर गंगा, सड़क किनारे रहने को मजबूर बाढ़ पीड़ित

Bihar Flood: गंगा और महानंदा नदी के जलस्तर में लगातार हो रही बढ़ोतरी से कटिहार के अमदाबाद प्रखंड में बाढ़ का संकट दिन-ब-दिन विकराल होता जा रहा है।

Bihar Flood: गंगा-महानंदा का कहर, डेंजर लेवल से 43 सेंटीमीटर
: गंगा-महानंदा का कहर- फोटो : Hiresh Kumar

Bihar Flood:  गंगा और महानंदा नदी के जलस्तर में लगातार हो रही बढ़ोतरी से कटिहार के अमदाबाद प्रखंड में बाढ़ का संकट दिन-ब-दिन विकराल होता जा रहा है। गंगा नदी का जलस्तर खतरे के निशान से करीब 43 सेंटीमीटर ऊपर बह रहा है। नदी के बढ़ते पानी ने प्रखंड की कई पंचायतों को अपनी चपेट में ले लिया है। बड़ी संख्या में ग्रामीणों के घर-आंगन में पानी घुस चुका है और लोगों की जिंदगी पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गई है।

बाढ़ की सबसे भयावह तस्वीर पार दियारा और दक्षिणी करीमुल्लापुर पंचायत से सामने आ रही है। जलेबी टोला समेत आसपास के कई गांवों में पानी फैलने के बाद लोग अपने घर छोड़कर सुरक्षित ठिकानों की तलाश में ऊंचे स्थानों और सड़कों का रुख कर रहे हैं। कई परिवार सड़क किनारे अस्थायी आशियाना बनाकर किसी तरह दिन काटने को मजबूर हैं।पार दियारा, दुर्गापुर, खट्टी भवानीपुर, चौकिया पहाड़पुर समेत कई पंचायतों में बाढ़ का असर दिखाई दे रहा है। ग्रामीणों के सामने सबसे बड़ी चुनौती खाने-पीने की सामग्री और रहने की जगह को लेकर है। लगातार बढ़ते पानी ने रोजमर्रा की जिंदगी पर ब्रेक लगा दिया है।ग्रामीणों का कहना है कि गंगा और महानंदा दोनों नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। हर दिन पानी बढ़ने के साथ बाढ़ का दायरा भी फैल रहा है। कई इलाकों में पानी घरों तक पहुंच चुका है और परिवारों को मजबूरी में ऊंचे स्थानों पर जाना पड़ रहा है।

बाढ़ प्रभावित ग्रामीणों की एक बड़ी परेशानी आवागमन को लेकर भी है। लोगों का कहना है कि सरकार की ओर से नाव की पर्याप्त व्यवस्था नहीं की गई है। ऐसे में किसी जरूरी काम से बाहर निकलने के लिए उन्हें निजी नाव का सहारा लेना पड़ रहा है और इसके लिए किराया भी देना पड़ रहा है।

ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल राहत सामग्री और प्लास्टिक शीट उपलब्ध कराने की मांग की है, ताकि सड़क किनारे या खुले में रह रहे परिवारों को बारिश और तेज धूप से राहत मिल सके। बाढ़ ने पशुपालकों की मुश्किलें भी बढ़ा दी हैं। पानी फैल जाने के कारण खेतों और चारा उपलब्ध कराने वाले इलाकों तक पहुंचना मुश्किल हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि पशुओं के लिए चारा जुटाना लगातार चुनौती बनता जा रहा है और सरकारी स्तर पर अभी तक पर्याप्त चारे की व्यवस्था नहीं की गई है।

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बाढ़ पीड़ितों ने प्रशासन से राहत शिविर, भोजन, पीने का पानी, प्लास्टिक शीट और पशुओं के लिए चारे की तत्काल व्यवस्था करने की गुहार लगाई है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर जलस्तर में इसी तरह वृद्धि जारी रही तो हालात और भयावह हो सकते हैं।फिलहाल अमदाबाद में बाढ़ का पानी लगातार बढ़ रहा है और ग्रामीणों की निगाहें प्रशासन की राहत व्यवस्था पर टिकी हैं। सवाल यही है कि पानी बढ़ने के साथ बढ़ती मुसीबत के बीच प्रभावित परिवारों तक राहत कब और कितनी तेजी से पहुंचती है।

रिपोर्ट- श्याम कुमार सिंह