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Bihar News: गणेश चतुर्थी की कलश यात्रा में मातम, बरंडी नदी में डूबे दो बच्चे, एक की मौत

Bihar News: गणेश चतुर्थी के मौके पर निकली कलश यात्रा के दौरान उस वक्त चीख-पुकार मच गई, जब बरंडी नदी में स्नान करने गए दो बच्चे गहरे पानी में डूब गए।

Ganesh Chaturthi Tragedy Child Drowns in Katihar River
कलश यात्रा में मातम- फोटो : reporter

Bihar News: कटिहार जिले के फलका प्रखंड क्षेत्र में गणेश चतुर्थी के मौके पर निकली कलश यात्रा के दौरान उस वक्त चीख-पुकार मच गई, जब बरंडी नदी में स्नान करने गए दो बच्चे गहरे पानी में डूब गए। हादसे के बाद मौके पर अफरातफरी का माहौल बन गया। स्थानीय ग्रामीणों ने तत्परता दिखाते हुए दोनों बच्चों को नदी से बाहर निकाला। हालांकि, तमाम कोशिशों के बावजूद एक बच्चे की जान नहीं बचाई जा सकी, जबकि दूसरे बच्चे को बचा लिया गया।

बताया जा रहा है कि गणेश चतुर्थी को लेकर इलाके में कलश यात्रा का आयोजन किया गया था। इसी दौरान दो बच्चे बरंडी नदी में स्नान करने चले गए। नदी में उतरते ही दोनों बच्चे गहरे पानी की चपेट में आ गए और डूबने लगे। बच्चों को डूबता देख आसपास मौजूद लोगों में हड़कंप मच गया। ग्रामीणों ने बिना देर किए नदी में उतरकर तलाश शुरू की और काफी मशक्कत के बाद दोनों को बाहर निकाला।एक बच्चे को तत्काल बचा लिया गया, लेकिन दूसरे बच्चे की हालत गंभीर थी। हादसे में उसकी मौत हो गई। घटना के बाद मृतक बच्चे के परिवार में कोहराम मच गया और गणेश चतुर्थी की खुशियां मातम में बदल गईं।

इस दर्दनाक हादसे के बाद नदी घाटों पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि शांति समिति की बैठकों में कलश यात्रा और नदी घाटों पर सुरक्षा, बैरिकेडिंग तथा अन्य जरूरी इंतजामों को लेकर चर्चा होने के बावजूद जमीनी स्तर पर पर्याप्त व्यवस्था क्यों नहीं की गई?

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि नदी घाट पर समय रहते पर्याप्त सुरक्षा कर्मियों, बैरिकेडिंग और प्रशिक्षित गोताखोरों की तैनाती होती तो हादसे की स्थिति में तत्काल बचाव अभियान शुरू किया जा सकता था। लोगों का आरोप है कि महज बैठक में सुरक्षा इंतजामों पर चर्चा करने से काम नहीं चलेगा, बल्कि संवेदनशील घाटों पर प्रशासन को पहले से पुख्ता इंतजाम करने होंगे।

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घटना ने एक परिवार से उसका सदस्य छीन लिया है। अब जरूरत इस बात की है कि प्रशासन हादसे से सबक लेते हुए आगामी धार्मिक आयोजनों और नदी घाटों पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर ठोस कदम उठाए, ताकि आस्था के आयोजनों में किसी और परिवार को ऐसी हृदयविदारक त्रासदी का सामना न करना पड़े।

रिपोर्ट- श्याम कुमार सिंह