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Bihar Flood: बाढ़ का दर्दनाक मंजर, बच्चों के हाथ में नाव की पतवार, चंद रुपयों के लिए जिंदगी से खिलवाड़

Bihar Flood: पिछले करीब 15 दिनों से बाढ़ का पानी लोगों की मुश्किलें बढ़ा रहा है। गांवों की सड़कें डूब चुकी हैं और आवागमन के लिए नाव ही एकमात्र सहारा बनी हुई है। लेकिन...

Flood Forces Children to Become Boatmen in Bihar Katihar
बाढ़ में नन्हे नाविक!- फोटो : reporter

Bihar Flood:  बाढ़ की तबाही, बेबसी और लाचारी के बीच कटिहार जिले के बरारी प्रखंड से ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने प्रशासनिक इंतजामों पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मोहनाचांदपुर पंचायत में पिछले करीब 15 दिनों से बाढ़ का पानी लोगों की मुश्किलें बढ़ा रहा है। गांवों की सड़कें डूब चुकी हैं और आवागमन के लिए नाव ही एकमात्र सहारा बनी हुई है। लेकिन इसी मजबूरी के बीच अब नन्हे बच्चों के हाथों में नाव की पतवार दिखाई दे रही है।

बताया जा रहा है कि महज 12 और 14 साल की उम्र के बच्चे बाढ़ के पानी में नाव चलाकर लोगों को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचा रहे हैं। निजी नाव से लोगों को गांव तक पहुंचाने के एवज में बच्चों को करीब 5 से 10 रुपये मिलते हैं। चंद रुपयों के लिए इन बच्चों का बाढ़ के तेज बहाव के बीच नाव चलाना न सिर्फ उनके लिए बल्कि नाव पर सवार लोगों की जिंदगी के लिए भी बड़ा जोखिम है।

12 वर्षीय अमित कुमार ने बताया कि जब भी इलाके में बाढ़ आती है, वह नाव चलाता है। लोगों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने के बदले उसे 5 से 10 रुपये तक मिल जाते हैं। वहीं 12 वर्षीय मनीष कुमार भी नाव चलाकर लोगों को ऊंचे स्थानों तक पहुंचाता है और इसके बदले करीब 5 रुपये कमाता है।बाढ़ के बीच इन बच्चों का नाव चलाना तस्वीर का ऐसा पहलू है, जिसमें मजबूरी, गरीबी और प्रशासनिक इंतजामों की कमी एक साथ दिखाई दे रही है। सवाल यह है कि जिस उम्र में बच्चों के हाथों में किताब और स्कूल बैग होना चाहिए, उस उम्र में उनके हाथों में नाव की पतवार क्यों है?

फिलहाल इलाके में पानी का स्तर कुछ कम बताया जा रहा है, लेकिन बाढ़ की स्थिति में जलस्तर और बहाव कभी भी बढ़ सकता है। ऐसे में बिना पर्याप्त प्रशिक्षण के बच्चों द्वारा नाव चलाना जानलेवा साबित हो सकता है।कटिहार के सांसद तारिक अनवर ने भी इस मामले को गंभीर बताते हुए चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि बाढ़ प्रभावित इलाकों में नाव के साथ प्रशिक्षित नाविक की व्यवस्था होना जरूरी है। अगर जलस्तर बढ़ा और बच्चे नाव चलाते रहे तो स्थिति बेहद खतरनाक हो सकती है।सांसद ने जिला प्रशासन और सरकार से मांग की है कि बच्चों को नाव संचालन से हटाकर प्रशिक्षित नाविकों की तैनाती की जाए, ताकि बाढ़ पीड़ितों का आवागमन सुरक्षित तरीके से हो सके।

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मोहनाचांदपुर पंचायत में लंबे समय से बाढ़ की स्थिति बनी हुई है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल सरकारी नाव और प्रशिक्षित नाविकों की उपलब्धता को लेकर है। यदि प्रशासन की ओर से पर्याप्त नाव और नाविक उपलब्ध होते तो क्या बच्चों को चंद रुपयों के लिए अपनी जान जोखिम में डालकर पतवार संभालनी पड़ती?

बाढ़ सिर्फ पानी का सैलाब नहीं होती, बल्कि अपने साथ भूख, बेबसी, विस्थापन और जोखिम भी लेकर आती है। मोहनाचांदपुर में नन्हे बच्चों का नाव चलाना इसी मजबूरी की तस्वीर पेश कर रहा है।अब निगाहें जिला प्रशासन पर हैं कि वह इन नन्हे नाविकों की सुरक्षा के लिए क्या कदम उठाता है और बाढ़ प्रभावित गांवों में सुरक्षित आवागमन के लिए सरकारी नाव तथा प्रशिक्षित नाविकों की व्यवस्था कब तक सुनिश्चित की जाती है।मामला सिर्फ बच्चों के नाव चलाने का नहीं, बल्कि बाढ़ प्रबंधन और सरकारी राहत व्यवस्था की जमीनी हकीकत का भी है। चंद रुपये कमाने के लिए अगर बच्चों को उफनते पानी में उतरना पड़े, तो यह निश्चित तौर पर व्यवस्था के लिए एक गंभीर चेतावनी है।

रिपोर्ट- श्याम कुमार सिंह