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Bihar News : कैमूर स्वास्थ्य विभाग में मची खलबली, उपाधीक्षक ने नियम ताक पर रख निकाला अपना ₹32 लाख का एरियर, कर्मियों का अटका वेतन

Bihar News : कैमूर जिले का स्वास्थ्य विभाग फिर एक बार चर्चा में है. जहाँ उपाधीक्षक ने 8 साल का बकाया एरियर करीब 32 लाख रुपया निकाल लिया. जिससे कर्मियों का वेतन अटक गया है......पढ़िए आगे

Bihar News : कैमूर स्वास्थ्य विभाग में मची खलबली, उपाधीक्षक
वेतन के लाले - फोटो : DEVBRAT

KAIMUR :  जिले का स्वास्थ्य विभाग एक बार फिर बड़े विवादों और चर्चाओं के घेरे में है। इस बार मामला मोहनियां अनुमंडल अस्पताल का है, जहां नवनियुक्त उपाधीक्षक डॉ. प्रेम शंकर सिंह पर वित्तीय अनियमितता और विभागीय नियमों के उल्लंघन का गंभीर आरोप लगा है। आरोप है कि डॉ. सिंह ने प्रभार मिलते ही नियम-कानून को ताक पर रखकर अपने 8 साल का बकाया एरियर लगभग 32 लाख रुपये का एकमुश्त भुगतान खुद को कर लिया। इस भारी-भरकम निकासी के कारण अस्पताल के अन्य स्वास्थ्य कर्मियों के जून माह के वेतन के लाले पड़ गए हैं और फंड खाली होने से उनका वेतन रुक गया है।

विभागीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, मोहनियां अनुमंडल अस्पताल में उपाधीक्षक डॉ. प्रेम शंकर सिंह का साल 2019 से अब तक का एरियर बकाया था। जैसे ही उन्हें अस्पताल का प्रशासनिक प्रभार मिला, उन्होंने प्राथमिकता के आधार पर सबसे पहले अपने ही ₹32 लाख के एरियर की निकासी सुनिश्चित कर ली। जब अस्पताल के अन्य अधिकारी-कर्मचारियों को जून महीने का वेतन नहीं मिला, तो उनके बीच आक्रोश फैल गया। पीड़ित कर्मियों ने एकजुट होकर इस मनमानी के खिलाफ कैमूर के सिविल सर्जन को एक लिखित आवेदन देकर न्याय की गुहार लगाई है।

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इस पूरे गंभीर मामले को संज्ञान में लेते हुए कैमूर के सिविल सर्जन डॉ. चंदेश्वरी रजक ने सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। सिविल सर्जन ने बताया कि उपाधीक्षक द्वारा किया गया यह कृत्य पूरी तरह से विभागीय नियमों के खिलाफ है। उन्होंने कहा की अगर सरकारी फंड में पैसा उपलब्ध था, तो उपाधीक्षक की यह पहली जिम्मेदारी थी कि वह अस्पताल के छोटे-बड़े सभी कर्मियों के मासिक वेतन का भुगतान करते, न कि खुद का सालों पुराना एरियर डकार जाते। इस मनमानी निकासी की वजह से ही जून महीने का कर्मियों का वेतन अटका है।

सिविल सर्जन ने आगे बताया कि इस मामले में डॉ. प्रेम शंकर सिंह से पहले भी एक बार लिखित स्पष्टीकरण मांगा गया था, लेकिन उन्होंने उसका कोई जवाब नहीं दिया। उपाधीक्षक की इस टालमटोल नीति को देखते हुए अब उन्हें दूसरी बार कड़ा स्पष्टीकरण भेजने की तैयारी की जा रही है। अगर इस बार भी संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो उनके खिलाफ बड़ी विभागीय और अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए मुख्यालय को लिखा जाएगा।

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दूसरी तरफ, आरोपी उपाधीक्षक डॉ. प्रेम शंकर सिंह ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे महज एक अफवाह करार दिया है। जब मीडिया ने उनसे इस बाबत सवाल किया, तो उन्होंने गोल-मोल जवाब देते हुए कहा कि वेतन के फंड में पर्याप्त पैसा मौजूद है। उन्होंने अस्पताल के बड़ा बाबू को निर्देश दे दिया है कि कर्मियों के वेतन भुगतान की प्रक्रिया जल्द से जल्द पूरी की जाए। बहरहाल, उपाधीक्षक के इन दावों और सिविल सर्जन की सख्ती के बीच अस्पताल के कर्मियों में भारी असंतोष व्याप्त है और वे जल्द से जल्द अपने वेतन भुगतान की मांग पर अड़े हैं।

देवब्रत की रिपोर्ट