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शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी का बड़ा बयान : बिहार में शिक्षा व्यवस्था का बदलेगा मॉडल, हर छात्र बनेगा डॉ. राजेंद्र प्रसाद जैसा होनहार

बिहार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव की बात की है। उन्होंने कहा है कि बिहार में ऐसा शिक्षा का मॉडल बनेगा जिससे हर छात्र डॉ. राजेन्द्र प्रसाद जैसा होनहार होगा। वहीं उन्होंने शिक्षकों को भी सख्त लहजे में ..

शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी का बड़ा बयान : बिहार में शिक्षा
बिहार में शिक्षा व्यवस्था का बदलेगा मॉडल : शिक्षा मंत्री- फोटो : देवव्रत

Kaimoor : बिहार सरकार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने सूबे की शिक्षा व्यवस्था में क्रांतिकारी बदलाव और सुधार को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। शिक्षा मंत्री बनने के बाद पहली बार कैमूर जिले के रामगढ़ और मोहनियां में आयोजित कार्यक्रमों में शामिल होने पहुंचे मंत्री ने कहा कि अब बिहार के सरकारी स्कूलों का हर बच्चा देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद जैसा होनहार छात्र बनकर निकलेगा। उन्होंने घोषणा की कि बच्चों के 'ब्रेन' (दिमाग) की क्षमता और रुचि के अनुसार ही उन्हें संबंधित क्षेत्र की विशेष पढ़ाई कराई जाएगी, जिसका आदेश जल्द ही पूरे राज्य में लागू होगा। इसके साथ ही उन्होंने विभागीय अधिकारियों को चेतावनी देते हुए साफ किया कि शिक्षा विभाग "सरस्वती माता का मंत्रालय" है, यहां भ्रष्टाचार और "लक्ष्मी माता की आराधना" कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।


शिक्षकों के लिए जिला कैडर की घोषणा, महिलाओं को गृह पंचायत में मिलेगी पोस्टिंग

शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने कैमूर की जनसभा को संबोधित करते हुए शिक्षकों के हित और स्थानांतरण नीति को लेकर कई महत्वपूर्ण फैसलों का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि अब बिहार में शिक्षकों का एक स्थाई 'जिला कैडर' बनाया जाएगा। इसके तहत जो शिक्षक जिस जिले का चयन करेंगे, वे भविष्य में वहीं के होकर रह जाएंगे। यदि कोई शिक्षक बीच में अपना जिला बदलता है, तो उसकी पुरानी वरिष्ठता (Seniority) पूरी तरह समाप्त मान ली जाएगी। इसके अलावा महिला शिक्षकों की समस्याओं को देखते हुए उनकी पदस्थापना (Posting) उनके सबसे निकटतम पंचायत में करने और पुरुष शिक्षकों की पोस्टिंग उनके निकटतम प्रखंड (Block) में करने की बड़ी घोषणा की गई है।


पोर्टल पर बनेगी हाजिरी, छात्रों की प्रगति तय करेगी शिक्षकों का मूल्यांकन

शिक्षा व्यवस्था को पूरी तरह पारदर्शी और समयबद्ध बनाने के लिए अब तकनीक का सहारा लिया जाएगा। शिक्षा मंत्री ने बताया कि अब सभी शिक्षकों को शिक्षा विभाग के आधिकारिक डिजिटल पोर्टल पर ही अपनी हाजिरी (Attendance) दर्ज करानी होगी। यही नहीं, शिक्षकों की कार्यकुशलता और उनका मूल्यांकन अब केवल कागजों पर नहीं, बल्कि उनके द्वारा पढ़ाए जा रहे छात्रों की 'प्रोग्रेस रिपोर्ट' (प्रगति पत्र) के आधार पर तय किया जाएगा। इसके साथ ही 'एक पद-एक शिक्षक' के सिद्धांत को कड़ाई से लागू करते हुए एक स्वीकृति पत्र पर केवल एक ही शिक्षक की नियुक्ति सुनिश्चित की जाएगी ताकि किसी भी तरह के फर्जीवाड़े को रोका जा सके।


ससुराल जाने के लिए नहीं, बच्चों को पढ़ाने के लिए स्कूल जाएंगे शिक्षक: मंत्री

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शिक्षकों की जवाबदेही तय करते हुए शिक्षा मंत्री ने कड़े लहजे में कहा कि राज्य सरकार शिक्षकों को मिलने वाली सभी आवश्यक सुविधाओं और सम्मान का पूरा ख्याल रखेगी, परंतु बच्चों की पढ़ाई-लिखाई में किसी भी स्तर पर शिथिलता या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि "अब शिक्षक ससुराल जाने के लिए नहीं, बल्कि देश के भविष्य यानी बच्चों की नियमित और गुणवत्तापूर्ण पढ़ाई के लिए हर दिन समय पर विद्यालय जाएंगे।" उन्होंने बताया कि बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए राज्य के प्रत्येक प्रखंड में एक 'मॉडल विद्यालय' का चयन कर लिया गया है, जहां अंतरराष्ट्रीय स्तर की शिक्षा व्यवस्था बहाल की जाएगी। इसके अलावा भूमिहीन और उन्नयन (अपग्रेड) वाले विद्यालयों की सूची तैयार कर तेजी से काम शुरू कराया जाएगा।


लालू परिवार पर कसा तंज; तेजस्वी के बंगले में जाकर रहे पूरा कुनबा

कैमूर दौरे के दौरान शिक्षा मंत्री रामगढ़ में जहां भाजपा के सांगठनिक कार्यक्रम में शामिल हुए, वहीं मोहनियां में उन्होंने 'सनातन संस्कृति चेतना मंच' के मंच से समाज को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के परिवार पर तीखा राजनीतिक हमला भी बोला। सरकारी आवास खाली न करने के मुद्दे पर तंज कसते हुए मिथिलेश तिवारी ने कहा कि राज्य में नियम के मुताबिक सभी लोग अपने सरकारी आवास खाली कर रहे हैं, सिर्फ लालू परिवार को छोड़कर। उन्होंने कहा, "राजपाट चला गया है, यह कोई पुश्तैनी जागीर थोड़े ही है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव को नियम के तहत जो बंगला मिला हुआ है, लालू जी के पूरे परिवार को उसी में जाकर मर्यादा के साथ रहना चाहिए।"

देवव्रत की रिपोर्ट