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नौकरी छोड़ शुरू की विदेशी आमों की खेती, एक ही पेड़ से उग रहे 12 किस्म के आम; लोग बोल रहे- 'सोना उगल रही मिट्टी'

बिहार के किसानों का कमाल! जमुई के सिंगारपुर गांव के दो भाइयों ने अपनी 'पुष्पवाटिका नर्सरी' में एक ही पेड़ पर 12 तरह के आम उगाकर सबको हैरान कर दिया है।यहाँ दुनिया का सबसे महंगा जापानी 'मियाजाकी' और थाईलैंड का 'बनाना मैंगो' भी उग रहा है।

Agriculture Success Story Bihar
एक ही पेड़ पर उगा रहे 12 तरह के आम, विदेशी मियाजाकी से कर रहे ₹12 लाख सालाना कमाई!- फोटो : news 4 nation

बिहार के जमुई जिले के सिंगारपुर गांव में दो भाइयों, कनिष्क कुमार गुप्ता और राम प्रसाद गुप्ता ने आधुनिक तकनीक और नई सोच के दम पर बागवानी के क्षेत्र में इतिहास रच दिया है. नौकरी के पीछे भागने के बजाय इन भाइयों ने कृषि विज्ञान केंद्र से प्रशिक्षण लिया और अपने पिता शत्रुधन साव द्वारा 40 वर्ष पहले शुरू की गई एक छोटी सी नर्सरी को आधुनिक रूप दे दिया. आज उनकी 'पुष्पवाटिका नर्सरी' आधुनिक बागवानी का एक बेहतरीन मॉडल बन चुकी है, जिसे देखने दूर-दूर से किसान पहुंच रहे हैं.

एक ही पेड़ पर 12 तरह के आम, मियाजाकी से बनाना मैंगो तक का सफर

इस नर्सरी की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहाँ ग्राफ्टिंग (कलम) तकनीक की मदद से एक ही पौधे पर 2 से लेकर 12 अलग-अलग किस्मों के आम उगाए जा रहे हैं. कनिष्क गुप्ता के अनुसार, जमुई की जलवायु विदेशी आमों के लिए बेहद अनुकूल है. यहाँ जापान का विश्व प्रसिद्ध और बेहद महंगा 'मियाजाकी' आम और थाईलैंड का 'बनाना मैंगो' (जो करीब 18 इंच लंबा और 1 किलो तक वजनी होता है) सफलतापूर्वक उगाया जा रहा है. इसके अलावा मालदा, अल्फोंसो, दशहरी और अम्रपाली जैसी लोकप्रिय देशी किस्में भी तैयार की जा रही हैं.

शुरुआती उपहास को पीछे छोड़ अब 50 विदेशी किस्मों का लक्ष्य

राम प्रसाद गुप्ता बताते हैं कि जब उन्होंने पारंपरिक खेती छोड़कर यह नया प्रयोग शुरू किया था, तब शुरुआत में लोगों ने उनका काफी मजाक उड़ाया था. लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और लगातार मेहनत करते रहे. आज वही लोग उनकी इस अभूतपूर्व सफलता की सराहना कर रहे हैं. अपनी कामयाबी से उत्साहित दोनों भाई अब आम की गुठली के बेहतर उपयोग पर शोध कर रहे हैं और आने वाले समय में 50 से अधिक विदेशी किस्मों के आम स्थानीय किसानों तक पहुंचाने के लक्ष्य पर काम कर रहे हैं.

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सालाना 12 लाख की कमाई और किसानों के लिए नया संदेश

दृढ़ संकल्प और नवाचार के बल पर आज दोनों भाई इस नर्सरी से सालाना करीब 12 लाख रुपये की शानदार कमाई कर रहे हैं. सिंगारपुर के ये सफल किसान अन्य सहयोगियों को सलाह देते हैं कि पारंपरिक फसलों के साथ-साथ खेतों की मेड़ों पर फलदार पौधे लगाकर अपनी आय को कई गुना बढ़ाया जा सकता है. इन भाइयों की आत्मनिर्भरता की यह कहानी साबित करती है कि अगर सही तकनीक और सूझबूझ का इस्तेमाल किया जाए, तो बिहार का किसान भी विश्वस्तरीय खेती कर अपनी तकदीर बदल सकता है.