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Bihar school dispute: स्कूल का रास्ता बंद, विरोध में बच्चों का सड़क पर आक्रोश मार्च, किताबें रास्ता देखती रह गईं…

Bihar school dispute: इंदिरा आवास प्राथमिक विद्यालय तक जाने वाला रास्ता बंद कर दिए जाने से पूरा शिक्षा तंत्र प्रभावित हो गया।

school route blocked students jam Gopalganj Bettiah road
स्कूल का रास्ता बंद- फोटो : reporter

Bihar school dispute:गोपालगंज जिले से एक ऐसी सनसनीखेज घटना सामने आई है, जिसने प्रशासनिक व्यवस्था और ग्रामीण विवादों की जटिलता को फिर उजागर कर दिया है। कररिया गांव के समीप दलित बस्ती में स्थित इंदिरा आवास प्राथमिक विद्यालय तक जाने वाला रास्ता बंद कर दिए जाने से पूरा शिक्षा तंत्र प्रभावित हो गया।

आरोप है कि आपसी भूमि विवाद के चलते कुछ लोगों ने स्कूल तक पहुंचने वाले संकरे रास्ते को मिट्टी और अवरोधक डालकर पूरी तरह बंद कर दिया। सुबह जब मासूम बच्चे विद्यालय पहुंचे तो रास्ता अवरुद्ध देख उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। स्कूल पहुंचना तो दूर, दर्जनों छात्र-छात्राएं और शिक्षक परिसर तक भी नहीं पहुंच सके।

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इस घटना से गुस्साए बच्चों और अभिभावकों का आक्रोश फूट पड़ा। हाथों में तख्तियां लिए बच्चों ने “रास्ता खोलो, पढ़ाई शुरू करो” जैसे नारे लगाते हुए गोपालगंज–बेतिया मुख्य सड़क को जाम कर दिया। देखते ही देखते सड़क पर लंबा जाम लग गया और यातायात व्यवस्था चरमरा गई। कई स्कूल बसें, निजी वाहन और यात्री गाड़ियां घंटों फंसी रहीं।

विद्यालय की प्रधानाध्यापिका मीना कुमारी ने आरोप लगाया कि यह स्कूल लगभग 20 वर्षों से संचालित है और रास्ता भी वर्षों से उपयोग में था, लेकिन हाल ही में जमीन की रजिस्ट्री के बाद कुछ लोगों ने मनमाने तरीके से स्कूल का रास्ता ही बंद कर दिया, जिससे पूरा शैक्षणिक कार्य ठप पड़ गया।

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मामले की सूचना पर स्थानीय शिक्षक, ग्रामीण और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी को भी तत्काल जानकारी दी गई। काफी देर की समझाइश के बाद बच्चों और ग्रामीणों ने सड़क जाम समाप्त किया, जिसके बाद आवागमन बहाल हो सका।

वहीं, डीडीसी गौरव कुमार ने मौके का निरीक्षण करते हुए सख्त लहजे में कहा कि स्कूल के रास्ते में किसी भी प्रकार की बाधा बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि दोबारा ऐसी हरकत हुई तो दोषियों के खिलाफ विधि सम्मत कठोर कार्रवाई की जाएगी।

यह घटना ग्रामीण इलाकों में भूमि विवाद की उस कड़वी सच्चाई को उजागर करती है, जहां निजी झगड़ों की कीमत मासूम बच्चों की पढ़ाई से चुकाई जा रही है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस विवाद का स्थायी समाधान कब तक निकाल पाता है, या शिक्षा व्यवस्था यूं ही विवादों की भेंट चढ़ती रहेगी।

रिपोर्ट- नमोनारायण मिश्रा