LATEST NEWS

  • Today Panchang
  • Today Panchang: 18 अक्टूबर को कब से शुरू होगी अष्टमी तिथि? जानें शुभ समय

  • Bihar Weather
  • Bihar Weather: बिहार में दुर्गा पूजा के दौरान सुबह गुलाबी ठंड, दोपहर में तपिश, जानें कब बदलेगा मिजाज

  • Bihar News : वाल्मीकि टाइगर रिजर्व पर्यटकों के लिए फिर से खुला, नए पैकेज, हाथी सफारी और हेलीकॉप्टर सेवा से ईको-टूरिज्म को लगेंगे पंख
  • Bihar News : वाल्मीकि टाइगर रिजर्व पर्यटकों के लिए फिर से खुला, नए पैकेज, हाथी सफारी और हेलीकॉप्टर

  • Kolkata Durga Puja Stampede: चोरबागान पूजा पंडाल में मची भगदड़, कई लोग घायल, सप्तमी के दिन हादसा
  • Kolkata Durga Puja Stampede: चोरबागान पूजा पंडाल में मची भगदड़, कई लोग घायल, सप्तमी के दिन हादसा

  • Bihar News : भाजपा विधायक के करीबी बताए जा रहे शैलेश मिश्रा को गुजरात पुलिस ने बक्सर से उठाया, इस मामले में हुई गिरफ़्तारी
  • Bihar News : भाजपा विधायक के करीबी बताए जा रहे शैलेश मिश्रा को गुजरात पुलिस ने बक्सर से

Pitrupaksha 2026 : प्रेतशिला पर्वत पर पिंडदान के लिए उमड़ा आस्था का जनसैलाब, क्यों उड़ाया जाता है सत्तू, जानिए

पिंडदान का तीसरा दिन और गया श्राद्ध का दूसरा दिन है और आज प्रेत शीला पहाड़ के नीचे पिंडदान किया जा रहा है.

Pitrupaksha 2026 : प्रेतशिला पर्वत पर पिंडदान के लिए उमड़ा आ
प्रेतशिला पर्वत पर पिंडदान- फोटो : MANOJ

GAYAJI : विश्व प्रसिद्ध गयाजी में पितृपक्ष महासंगम का भव्य आयोजन जारी है, जहां देश के कोने-कोने से लाखों श्रद्धालु अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति और मोक्ष की कामना के लिए पहुंच रहे हैं। तीर्थयात्री पूरी श्रद्धा और नियम-निष्ठा के साथ विभिन्न पावन वेदियों पर पिंडदान का कर्मकांड संपन्न कर रहे हैं। इस महापर्व के तहत रविवार को पिंडदान का तीसरा दिन और गया श्राद्ध का दूसरा दिन रहा। इस अवसर पर गयाजी स्थित सुप्रसिद्ध प्रेतशिला पहाड़ी और उसके तराई क्षेत्र की वेदी पर विशेष पिंडदान सह तर्पण का कार्य पूरा किया गया। प्रेतशिला वेदी का धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व है, जहां तड़के सुबह से ही पितरों के उद्धार के लिए श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा।

धार्मिक मान्यताओं और स्थानीय पंडा समाज के अनुसार, प्रेतशिला वेदी पर मुख्य रूप से उन पूर्वजों के लिए पिंडदान किया जाता है जिनकी अकाल मृत्यु हुई हो—जैसे दुर्घटना, बीमारी, या किसी दुर्घटनात्मक कारण से असमय जान गंवाना। ऐसी भटकती आत्माओं को प्रेत योनि से मुक्ति दिलाने के लिए प्रेतशिला पर पिंडदान किया जाता है। माना जाता है कि प्रेतशिला पर्वत पर भगवान ब्रह्मा जी द्वारा खींची गई तीन रेखाएं विद्यमान हैं, जहां सत्तू उड़ाकर कर्मकांड करने से भटकती आत्माएं प्रेत योनि से मुक्त होकर स्वर्ग लोक को प्रस्थान करती हैं।

पंडा समाज के आचार्यों ने बताया कि त्रिपक्षीय श्राद्ध करने वाले श्रद्धालु अपने अनुष्ठान के दूसरे दिन प्रेतशिला पहुंचकर पिंडदान करते हैं। गया जी में तीर्थयात्री अपनी सुविधा और संकल्प के अनुसार 17 दिन, 5 दिन, 3 दिन या 1 दिन का पिंडदान कर्मकांड करते हैं। 17 दिवसीय गया श्राद्ध करने वाले देश-विदेश के कई परिवार यहां पहुंचे हैं; इसी क्रम में दिल्ली से आए एक परिवार ने अपने कई पीढ़ियों के पितरों के उद्धार के लिए प्रेतशिला में संपूर्ण विधि-विधान के साथ तर्पण व पिंडदान किया।

संपूर्ण गयाधाम में सुरक्षा और श्रद्धालुओं की सुविधाओं के लिए व्यापक प्रबंध किए गए हैं। प्रेतशिला पहाड़ी पर आने-जाने वाले रास्तों से लेकर वेदी स्थल तक प्रशासनिक सतर्कता बरती जा रही है, ताकि देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो और वे सुगमतापूर्वक अपने पितरों की मोक्ष कामना का संकल्प पूरा कर सकें।

NSIT
Nsmch

मनोज की रिपोर्ट