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Bihar News : वीरता की मिसाल ! घने जंगलों में 8 आतंकियों को किया ढेर, जानिए कीर्ति चक्र विजेता कर्नल पंकज कुमार की शौर्य गाथा

Bihar News :भारतीय सेना के वीर अधिकारियों की कहानियां केवल इतिहास के पन्नों तक सीमित नहीं रहतीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का अटूट स्रोत बन जाती हैं.....पढ़िए आगे

Bihar News : वीरता की मिसाल ! घने जंगलों में 8 आतंकियों को क
कर्नल पंकज कुमार की शौर्य गाथा- फोटो : SOCIAL MEDIA

GAYAJI : कुछ कहानियां केवल इतिहास के पन्नों तक सीमित नहीं रहती,बल्कि पीढ़ियों को प्रेरित करने वाली मिसाल बन जाती है। भारतीय सेना के वीर अधिकारी एवं कीर्ति चक्र से सम्मानित कर्नल पंकज कुमार की शौर्य गाथा भी एक ऐसी ही एक प्रेरक कहानी है। मीडिया ने विशेष बातचीत के लिए 6 बिहार बटालियन एनसीसी, गया जी के कमांडिंग ऑफिसर कर्नल पंकज कुमार, कीर्ति चक्र से संपर्क किया, तो उद्देश्य केवल शौर्य की कहानी दर्ज करना नहीं था, बल्कि युवा पीढ़ी के लिए नेतृत्व का एक सबक साझा करना था। लेफ्टिनेंट के रूप में एक समय जानलेवा जंगली ऑपरेशनों का सामना कर चुके कीर्ति चक्र से सम्मानित अधिकारी ने एक विशेष बातचीत में अपने सबसे चुनौतीपूर्ण सैन्य अभियान को याद किया। कर्नल कुमार ने साझा किया, “घने जंगल में हर कदम पर खतरा मंडरा रहा था। लेकिन टीम का अटूट मनोबल और राष्ट्र के प्रति हमारी सामूहिक प्रतिबद्धता ही हमारा सबसे बड़ा हथियार साबित हुई।” वर्तमान में 6 बिहार बटालियन एनसीसी, गया जी के कमांडिंग ऑफिसर के रूप में तैनात कर्नल पंकज कुमार हजारों कैडेट्स के लिए प्रेरणास्त्रोत बने हुए हैं। राष्ट्र के प्रति उनकी निस्वार्थ सेवा और दूरदर्शी नेतृत्व युवाओं को अनुशासन, साहस और राष्ट्र निर्माण की दिशा में नेतृत्व अपनाने के लिए प्रेरित कर रहा है।

खास बातचीत में साझा किए अनुभव

कर्नल पंकज कुमार ने बताया कि एक सैनिक के लिए सबसे अहम होता है अपने साथियों की सुरक्षा और मिशन की सफलता। उन्होंने कहा, “डर तो हर किसी को लगता है, लेकिन उसे काबू में रखकर सही निर्णय लेना ही असली बहादुरी है।” उन्होंने युवाओं को संदेश देते हुए कहा कि देश सेवा से बड़ा कोई धर्म नहीं है और अनुशासन, समर्पण व मेहनत से हर लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।

खतरनाक मिशन की शुरुआत

वर्ष 2007 में 7/11 गोरखा राइफल्स में तैनात लेफ्टिनेंट पंकज कुमार को एक विशेष ऑपरेशन के तहत आतंकवाद प्रभावित क्षेत्र में भेजा गया। 5 अप्रैल की करीब 1 बजे वे अपनी टीम के साथ घने जंगलों की ओर रवाना हुए। उनका लक्ष्य था—जंगल में छिपे आतंकवादियों का सफाया करना। करीब 30 किलोमीटर की कठिन पदयात्रा के बाद टीम जैसे ही लक्ष्य के करीब पहुंची, आतंकवादियों ने अचानक अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। हालात बेहद गंभीर हो गए, लेकिन टीम ने संयम बनाए रखा। स्थिति की गंभीरता को समझते हुए लेफ्टिनेंट पंकज कुमार ने तुरंत मोर्चा संभाला। उन्होंने न सिर्फ जवाबी फायरिंग की, बल्कि आतंकवादियों के बेहद करीब पहुंचकर मुकाबला किया और एक आतंकी को मार गिराया।

गोलियों की बौछार में भी डटे रहे

अन्य आतंकवादियों ने उन्हें निशाना बनाकर फायरिंग तेज कर दी, लेकिन वे पीछे नहीं हटे। गोलियों की बौछार के बीच भी उन्होंने अपने साथियों का हौसला बढ़ाया और ऑपरेशन का नेतृत्व करते रहे। उनकी बहादुरी से प्रेरित टीम ने डटकर मुकाबला किया और इस भीषण मुठभेड़ में कुल आठ आतंकवादी मार गिराए गए। इस दौरान वे गंभीर रूप से घायल हुए, लेकिन उनके नेतृत्व ने मिशन को सफल बनाया और कई साथियों की जान बचाई।

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साधारण परिवार से सेना तक का सफर

11 मार्च 1978 को उत्तर प्रदेश के बागपत जिले में जन्मे पंकज कुमार बचपन से ही देश सेवा का सपना देखते थे। उन्होंने केंद्रीय विद्यालय,जामनगर से प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की इंटरमीडिएट बेगमपेट सिकंदराबाद और स्नातक वेस्ली डिग्री कॉलेज सिकंदराबाद व मास्टर ऑफ कंप्यूटर एप्लीकेशन की डिग्री गाजियाबाद से हासिल की और वर्ष 2005 में भारतीय सेना में कमीशन प्राप्त किया। उनकी वीरता और अदम्य साहस को सम्मान देते हुए राष्ट्र ने उन्हें ‘कीर्ति चक्र’ से नवाजा, जो शांतिकाल में दिया जाने वाला देश का दूसरा सर्वोच्च वीरता पुरस्कार है।

वर्तमान में कर्नल के रूप में दे रहे सेवा

वर्तमान में कर्नल पंकज कुमार (कीर्ति चक्र) गया (बिहार) स्थित 6 बिहार बटालियन एनसीसी में कमांडिंग ऑफिसर के रूप में तैनात हैं। उनकी यह शौर्यगाथा आज भी युवाओं और सैनिकों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हुई है।