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Gaya : गया में पानी-बिजली के लिए सड़क पर उतरे छात्र, आखिर शिक्षा विभाग कब जागेगा?

गया जिले के गया-बोधगया मुख्य मार्ग स्थित राजकीय मध्य विद्यालय केंदुई में भीषण गर्मी के बीच बुनियादी सुविधाओं की कमी को लेकर छात्रों का गुस्सा फूट पड़ा। पानी, बिजली और पंखे की व्यवस्था नहीं होने से नाराज छात्रों ने सड़क जाम कर विरोध प्रदर्शन किया। इस

Gaya : गया में पानी-बिजली के लिए सड़क पर उतरे छात्र, आखिर शि

Gaya ji :  गया जिले के गया-बोधगया मुख्य मार्ग स्थित राजकीय मध्य विद्यालय केंदुई की तस्वीर ने बिहार की सरकारी शिक्षा व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। भीषण गर्मी में स्कूल के छात्र पानी, बिजली और पंखे जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए सड़क पर उतर आए और मुख्य मार्ग को जाम कर विरोध प्रदर्शन किया। सवाल यह है कि आखिर बच्चों को अपनी मूलभूत जरूरतों के लिए सड़क पर उतरने की नौबत क्यों आई?

छात्रों का आरोप है कि स्कूल में ना पीने के पानी की सही व्यवस्था है, ना बिजली है और ना ही पंखे चल रहे हैं। कई दिनों से बच्चे गर्मी और उमस में पढ़ाई करने को मजबूर थे। शिकायत करने के बावजूद स्कूल प्रशासन सिर्फ आश्वासन देता रहा, लेकिन व्यवस्था सुधारने की कोई गंभीर कोशिश नहीं हुई। आखिर कब तक सरकारी स्कूलों के बच्चों को सिर्फ वादों के भरोसे रखा जाएगा?

सबसे बड़ा सवाल बिहार के शिक्षा मंत्री मिथलेश तिवारी से है। एक तरफ सरकार बेहतर शिक्षा व्यवस्था, स्मार्ट क्लास और स्कूलों में सुविधाएं बढ़ाने के बड़े-बड़े दावे कर रही है, दूसरी तरफ बोधगया का यह स्कूल उन दावों की सच्चाई सामने ला रहा है। अगर सरकार शिक्षा सुधार को लेकर इतनी गंभीर है, तो फिर बच्चे पानी और पंखे के लिए सड़क जाम क्यों कर रहे हैं?

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यह पहली बार नहीं है जब गया जिले की शिक्षा व्यवस्था सवालों के घेरे में आई हो। इससे पहले भी गया शिक्षा विभाग और जिला शिक्षा पदाधिकारी पर कई गंभीर आरोप लग चुके हैं। कहीं स्कूलों में शिक्षक की कमी, कहीं जर्जर भवन, तो कहीं बच्चों को बुनियादी सुविधाएं तक नहीं मिल पा रही हैं। लेकिन हर बार जांच और कार्रवाई की बातें होती हैं और फिर मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है।

अब गया के जिलाधिकारी शशांक शुभंकर से भी लोग सीधे सवाल पूछ रहे हैं —
क्या सरकारी स्कूलों की मॉनिटरिंग सिर्फ फाइलों में हो रही है?
अगर निरीक्षण हो रहा था तो स्कूल में पानी और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाएं क्यों नहीं थीं?
क्या स्कूल प्रशासन और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होगी?
और आखिर गरीब बच्चों को ही हमेशा बदहाल व्यवस्था में पढ़ने के लिए क्यों मजबूर किया जाता है?

स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकार करोड़ों रुपये शिक्षा व्यवस्था पर खर्च करने का दावा करती है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि सरकारी स्कूलों में बच्चे आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। अगर स्कूलों में पानी, बिजली और पंखा तक नहीं है, तो फिर शिक्षा सुधार के दावे सिर्फ भाषण और पोस्टर तक सीमित नजर आते हैं।

घटना के बाद प्रशासन मौके पर पहुंचा और छात्रों को समझाकर सड़क जाम समाप्त कराया गया। लेकिन बड़ा सवाल अब भी कायम है — क्या बच्चों की समस्याओं का स्थायी समाधान होगा या फिर उन्हें एक बार फिर सिर्फ आश्वासन देकर शांत कर दिया जाएगा?