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पितृपक्ष मेले से पहले गया की बदहाल तस्वीर, नगर निगम की तैयारी पर सवाल!

नगर निगम ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए ₹572 करोड़ से अधिक का बजट सर्वसम्मति से पास हुआ था । मेयर गणेश पासवान ने इसे विकास और स्मार्ट सिटी की दिशा में बड़ा कदम बताया, लेकिन शहर की जमीनी हकीकत अब भी सवालों के घेरे में है। जगह-जगह जलजमाव, टूटी सड़क

पितृपक्ष मेले से पहले गया की बदहाल तस्वीर, नगर निगम की तैयार

Gaya : गया नगर निगम बोर्ड ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए ₹572 करोड़ 18 लाख 68 हजार 335 का बजट सर्वसम्मति से 27 फरवरी 2026 को सशक्त स्थायी समिति की बैठक में इस बजट प्रस्ताव को शुरुआती मंजूरी दी गई थी, जिसके बाद 7 मार्च को निगम बोर्ड की विशेष बैठक में इसे अंतिम रूप से पास किया गया। इस महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता गया के मेयर वीरेन्द्र कुमार उर्फ गणेश पासवान ने की थी।

नगर निगम प्रशासन और मेयर शहर को स्मार्ट सिटी की तर्ज पर विकसित करने के बड़े-बड़े दावे कर रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों से बिल्कुल अलग दिखाई दे रही है। धार्मिक और अंतरराष्ट्रीय पहचान रखने वाला गया शहर आज भी गंदगी, टूटे रास्तों, जाम नालों और मूलभूत सुविधाओं की कमी से जूझ रहा है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर हर साल करोड़ों रुपये के बजट के बावजूद शहर की हालत क्यों नहीं बदल रही?

गयाजी का धार्मिक महत्व पूरी दुनिया में है। पूरे साल देश और विदेश से लाखों श्रद्धालु विष्णुपद मंदिर में पिंडदान और धार्मिक अनुष्ठान करने पहुंचते हैं। आने वाले कुछ महीनों में विश्व प्रसिद्ध पितृपक्ष मेला भी लगने वाला है, जिसमें लाखों श्रद्धालुओं और पर्यटकों के आने की संभावना रहती है। लेकिन जिस शहर में दुनिया भर से श्रद्धालु पहुंचते हों, वहां आज भी गंदगी, जलजमाव और शौचालयों की कमी प्रशासनिक दावों की पोल खोल रही है।

नगर निगम की बैठकों में विकास और स्मार्ट सिटी की बातें जरूर होती हैं, लेकिन शहर की सड़कों पर उतरते ही व्यवस्था की सच्चाई सामने आ जाती है। कई इलाकों में कूड़े का अंबार लगा हुआ है। सार्वजनिक शौचालयों की भारी कमी है और जहां शौचालय बने भी हैं, वहां साफ-सफाई की स्थिति बेहद खराब है। शहर में आने वाले श्रद्धालु और पर्यटक भी इन व्यवस्थाओं से परेशान नजर आते हैं।

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गया जैसे धार्मिक शहर में हर साल लाखों श्रद्धालु पिंडदान और धार्मिक कार्यों के लिए पहुंचते हैं, लेकिन उन्हें साफ सड़कें, स्वच्छ शौचालय और बेहतर सफाई व्यवस्था तक नहीं मिल पाती। कई प्रमुख इलाकों की सड़कें टूट चुकी हैं। नालों की सफाई समय पर नहीं होने से जलनिकासी व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई दिखाई देती है। हल्की बारिश में भी कई मोहल्लों और सड़कों पर जलजमाव की स्थिति बन जाती है, जिससे आम लोगों को भारी परेशानी झेलनी पड़ती है।

जनवरी 2026 में गया नगर निगम के नगर आयुक्त का पद संभालने वाले 2020 बैच के IAS अधिकारी अभिषेक पलासिया से अब जनता सीधे सवाल पूछ रही है। लोगों का कहना है कि स्मार्ट सिटी के नाम पर सिर्फ योजनाएं और बैठकें हो रही हैं, लेकिन धरातल पर बदलाव दिखाई नहीं दे रहा।

अब सवाल सिर्फ नगर निगम तक सीमित नहीं रह गया है। मई 2026 में नगर विकास एवं आवास विभाग की जिम्मेदारी संभालने वाले मंत्री नीतीश मिश्रा पर भी लोगों की नजरें टिकी हुई हैं। मंत्री लगातार राज्य के शहरों में आधुनिक बुनियादी ढांचे के विकास की बात कर रहे हैं, लेकिन गया की हालत सरकार के दावों पर बड़ा सवाल खड़ा कर रही है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि हर साल बजट पास होता है, लेकिन शहर की स्थिति जस की तस बनी रहती है। अब जनता यह जानना चाहती है कि ₹572 करोड़ की इतनी बड़ी राशि आखिर किन योजनाओं पर खर्च होगी और उसका लाभ आम लोगों तक कब पहुंचेगा। लोगों का यह भी कहना है कि पुराने अधूरे प्रोजेक्ट्स का हिसाब अब तक साफ नहीं हो पाया है।

शहरवासियों के बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या इस बार नगर निगम सिर्फ घोषणा करेगा या वास्तव में शहर की व्यवस्था में सुधार दिखाई देगा? क्या टूटे रास्ते ठीक होंगे? क्या नालों की सफाई समय पर होगी? क्या पर्यटकों और श्रद्धालुओं के लिए पर्याप्त और स्वच्छ शौचालय बनेंगे? और सबसे बड़ा सवाल — क्या नगर निगम प्रशासन, नगर आयुक्त अभिषेक पलासिया और मंत्री नीतीश मिश्रा इन बदहाल व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी तय करेंगे?