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बिहार-झारखंड के डोभी चेकपोस्ट पर बड़ा खेल? दो क्लर्कों पर लगा लाखों की अवैध वसूली का आरोप,जांच की मांग

बिहार-झारखंड सीमा पर स्थित गया के डोभी बॉर्डर (चेकपोस्ट) पर जीएसटी के नाम पर प्रति शिफ्ट ₹31,000 की अवैध वसूली के गंभीर आरोप लगे हैं। क्लर्कों की भूमिका और अधिकारियों तक राशि पहुंचाने के दावों के बीच निष्पक्ष जांच की मांग उठ रही है।

Bihar Jharkhand border corruption case
गया के डोभी बॉर्डर पर GST के नाम पर अवैध वसूली का आरोप- फोटो : news 4 nation

बिहार-झारखंड सीमा पर स्थित गया जिले के डोभी चेकपोस्ट (बॉर्डर) पर अवैध वसूली का एक बड़ा और बेहद गंभीर मामला सामने आया है। स्थानीय स्तर पर लगाए गए आरोपों के मुताबिक, इस सीमा क्षेत्र से गुजरने वाले वाहनों और व्यापारियों से बड़े पैमाने पर अवैध उगाही का खेल चल रहा है। शिकायत में दावा किया गया है कि डोभी बॉर्डर पर सरकारी नियमों को ताक पर रखकर कथित तौर पर अवैध रूप से पैसों की लेन-देन की जा रही है, जिससे राजस्व को भारी नुकसान पहुंचने की आशंका है।

जीएसटी के नाम पर मोटी रकम की उगाही

शिकायत में लगाए गए वित्तीय आरोपों के अनुसार, बिहार और झारखंड दोनों ही सीमाओं की ओर से हर शिफ्ट में भारी-भरकम राशि वसूली जाती है। आरोप है कि वाणिज्यिक कर (GST) के नाम पर प्रत्येक शिफ्ट में लगभग ₹31,000-₹31,000 की अवैध वसूली को अंजाम दिया जा रहा है। 24 घंटे चलने वाले इस बॉर्डर पर अलग-अलग शिफ्टों में होने वाली इस कथित उगाही के कारण कुल मासिक रकम लाखों-करोड़ों में होने का अनुमान लगाया जा रहा है।

क्लर्कों की भूमिका और सिंडिकेट का दावा

इस पूरे कथित सिंडिकेट में विभागीय कर्मचारियों की संलिप्तता का भी दावा किया गया है। आरोपों के केंद्र में विकास कुमार और सूरज कुमार नामक दो व्यक्ति हैं, जिन्हें विभाग में क्लर्क बताया जा रहा है। शिकायतकर्ता का सीधा आरोप है कि वसूली गई इस अवैध राशि के पूरे वित्तीय प्रबंधन और हिसाब-किताब की जिम्मेदारी इन्हीं दोनों के पास है। इतना ही नहीं, यह दावा भी किया गया है कि इस काली कमाई का एक बड़ा हिस्सा मासिक आधार पर विभिन्न वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचाया जाता है।

निष्पक्ष जांच और कानूनी कार्रवाई की मांग

फिलहाल, इस पूरे मामले में लगाए गए सभी वित्तीय और प्रशासनिक आरोप पूरी तरह से शिकायतकर्ता के दावों पर आधारित हैं और इनकी कोई आधिकारिक पुष्टि होना अभी शेष है। हालांकि, मामले की गंभीरता को देखते हुए एक स्वतंत्र और सक्षम जांच एजेंसी से इसकी निष्पक्ष उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग उठ रही है। यदि जांच में इन आरोपों में रत्ती भर भी सच्चाई पाई जाती है, तो दोषियों के खिलाफ सख्त विधिसम्मत कार्रवाई होनी चाहिए, और यदि ये असत्य साबित होते हैं, तो भी स्थिति स्पष्ट होनी जरूरी है।

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