LATEST NEWS

  • Anant Singh
  • Bihar Politics: 62 मुकदमों के रिकॉर्ड वाले बाहुबली अनंत सिंह फिर जाएंगे जेल या बरकरार रहेगी जमानत?

  • President Colour Award
  • Bihar Police:बिहार पुलिस को मिलेगा देश का सर्वोच्च पुलिस सम्मान, राष्ट्रपति कलर अवार्ड से होंगे सम्मानित

  • Anant Singh MLA Status
  • Bihar Politics: अनंत सिंह की विधायकी पर लटकी तलवार! JDU की अर्जी पर अब इस दिन तय होगा

  • Bihar TRE-4
  • BPSC TRE-4 ने तोड़े भर्ती के सारे रिकॉर्ड, आवेदन के आंकड़े पढ़ कर चौक जाएंगे आप

  • Bihar Food Safety
  • Bihar Food Safety : बाजार में बिकने वाले खाद्य पदार्थ कितने शुद्ध? ऐसे करें मिलावट की पहचान, जानें

Bihar News : गया के 'नौकरी वाले खानदान' की 5 बेटियों ने रचा इतिहास, बिना कोचिंग ऑनलाइन पढ़ाई कर एक साथ बिहार पुलिस में बनीं सिपाही

Bihar News : गया में एक ही परिवार की पांच बेटियों ने एक साथ बिहार पुलिस में सिपाही के पद पर सफलता पाकर इतिहास रच दिया है......पढ़िए आगे

Bihar News : गया के 'नौकरी वाले खानदान' की 5 बेटियों ने रचा
बेटियों ने रचा इतिहास - फोटो : MANOJ

GAYAJI : बिहार के गया में एक परिवार की पांच बेटियां बिहार पुलिस में सफल हुई है. एक परिवार से पांच बेटियों की सफलता में साबित कर दिया है, कि अब लड़कियां किसी से कम नहीं. सबसे खास बात यह है, कि सरकारी स्कूल या आसपास में कोचिंग के अभाव के बीच ऑनलाइन पढ़ाई करके ही इन बेटियों ने इस तरह की सफलता का अध्याय गढ दिया. अब यह सफलता एक मिसाल बन गई है. एक परिवार की पांच बेटियों के बिहार पुलिस में सिपाही बनने के बाद हर कोई सुनकर हतप्रभ रह जा रहा है. वही, परिवार के लोगों का कहना है, कि पहले हम लोग बेटों को ही पढ़ाते लिखाते थे. किंतु, अब हमने बेटियों में भी बड़ा भविष्य देखा है. यही वजह है कि आज हमारे घर की पांच बेटियां बिहार पुलिस में सिपाही बनी. इस सफलता पर पूरे परिवार को जहां गर्व है. वही यह परिवार आज बिहार में एक मिसाल के रूप में देखा जा रहा है.

बंगाल महतो.. बंगाल बीघा, बीस से अधिक घर और एक खानदान में नौकरियों का तांता

जिस परिवार की पांच बेटियों ने बिहार पुलिस में सफलता पाई है, वह परिवार बंगाल महतो का है. बंगाल महतो इस परिवार के परदादा थे और उन्हीं के नाम पर यह बंगाल बीघा गांव बसा था. तब शिक्षा के नाम पर कुछ नहीं था. अशिक्षा इस परिवार की जड़ में थी. बंगाल महतो का वंश बढा पुत्र -पोते हुए. किंतु अशिक्षा तब भी कायम रही. इसका सबसे बड़ा कारण था, कि उस गांव में या आसपास कोई सरकारी स्कूल तक नहीं था. पढ़ाई की कोई सुविधा नहीं थी. जो भी सुविधा थी, वह कई किलोमीटर दूर होती थी, जहां पहुंचना यहां के लोगों के लिए उस समय की सुविधा के अनुसार अत्यंत ही मुश्किल सा था. इसके कारण बंगाल महतो के पीढ़ी के लोग भी अशिक्षित रह गए. किंतु कहा जाता है, कि समय करवट लेती है, तो ऐसा ही हुआ. 20-25 साल पहले गांव के ही इसी परिवार के रामबली यादव परिवार को शिक्षित करने के लिए आगे आए. उन्होंने एक छोटी सी निजी तौर पर स्कूल खोली. इसमें पढने परिवार के लोग आने लगे. 1993 के बाद से इस परिवार में नौकरियां लगने लगी. क्योंकि, रामबली यादव ने शिक्षा का अलख जगा दिया था. फिर जैसे-जैसे परिवार में लोग शिक्षित होने लगे, वैसे-वैसे पढ़ाई के लिए दूर-दूर जाने लगे और फिर शुरू हो गया नौकरियों का सिलसिला. इस परिवार से सरकारी नौकरियों में लोग जाने लगे. अब तो जैसे इस परिवार में नौकरियों का तांता लग गया है. आज एक- दो नहीं बल्कि इस परिवार से 20 से अधिक लोग सरकारी नौकरियों में है. इसके अलावा प्राइवेट नौकरियों में भी 10 से अधिक लोग हैं. इस परिवार के लोग बताते हैं, कि करीब 30 से 35 लोग सरकारी और प्राइवेट जॉब में है. अब इस परिवार की पहचान अशिक्षित परिवार के रूप में नहीं, बल्कि नौकरी वाले खानदान के रूप में की जाती है.

पांच बेटियों ने सफल होकर किया मिसाल कायम

अब इस परिवार की पांच बेटियों ने सफलता पाई है. इस परिवार की पांच बेटियों का बिहार पुलिस में चयन हुआ है. इस परिवार की पांच लड़कियों का एक साथ बिहार पुलिस में चयनित होने की खबर के बाद यह गांव चर्चा में आ गया है. बेटियों की सफलता बता रही है, कि अब इस परिवार में सिर्फ लड़के ही नौकरी नहीं करते, बल्कि लड़कियों को भी मौका दिया जाता है. यही वजह है, कि जैसे ही लड़कियों को आगे बढ़ने का प्रयास शुरू हुआ. लड़कियों ने बाजी मारी, अपने हौसले दिखाएं और बिहार पुलिस में चयनित हो गई है.

इंजीनियर, जेसीओ, रेलवे, पुलिस समेत कई विभागों में नौकरियां 

इस परिवार की नौकरियां कई विभागों में है. इस परिवार के लोग अभी इंजीनियर हैं. रेलवे में पोस्टेड है. बिहार पुलिस में नौकरी है  तो जेसीओ(फौज) के अलावे ग्रुप डी की भी नौकरियों में है. इसके अलावा शिक्षा समेत अन्य विभागों में भी है. कई बेहतर प्राइवेट जॉब भी कर रहे हैं. इस तरह सरकारी नौकरियों की संख्या इस परिवार में 20 के करीब है, तो प्राइवेट नौकरियां करने वाले 10 के आसपास हैं. इस तरह 30 से अधिक नौकरियां सरकारी और प्राइवेट को मिलाकर इस परिवार के लोग कर रहे हैं. अब इस परिवार को नौकरी वाला खानदान के रूप में पहचान मिलने लगी हैं. 

NSIT
Nsmch

आज भी गांव में सरकारी स्कूल नहीं 

आश्चर्य की बात है कि आज भी इस इलाके में सरकारी स्कूल नहीं है. सरकारी स्कूल के लिए कई किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है. पहाड़ की गोद में बंगाल बीघा गांव बसा है. एक तरह से यह जंगल का क्षेत्र है. किंतु यहां अब शिक्षा की जो लो अलख जग चुकी है, वह अब काफी आगे तक जाएगी और इस परिवार में की नौकरी लेने वालों की एक तरह से होड़ हो गई है. हर कोई आगे बढ़ना चाह रहा. शिक्षा से अब हर परिवार को लगाव है. बंगाल महतो पहले कुछ परिवारिक सदस्यों के साथ इस गांव में रहा करते थे. धीरे-धीरे बेटे- पोतेते के साथ वंश बढा और फिर अब यही परिवार अशिक्षा से काफी दूर निकालकर एक प्रेरणा का स्रोत बन चुका है. यह परिवार यह भी बता रहा, कि यदि सुविधा नहीं हो, या एकदम से कम हो, तो उसके बीच भी संघर्ष कर सफलता पाई जा सकती है. क्योंकि आज भी गांव में एक अदद सरकारी स्कूल नहीं है. इस गांव से तीन से चार किलोमीटर की दूरी पर कुछ दशक पहले एक सुजाता संस्था की स्कूल खुली, तो उसके बाद भी इस परिवार को शिक्षा के लिए थोङा सहारा मिला. बंगाल बीघा गांव अब अशिक्षा के दंश को लेकर नहीं, बल्कि नौकरियों को लेकर जाना जा रहा है. ऑनलाइन पढ़ाई कर सफल हुई पांच बेटियों ने एक नया अध्याय गढ दिया है.

यह बेटियां हुई है सफल, रुधा के पिता भी झारखंड पुलिस में

सफल होने वालों में बेटियों में चार चचेरी बहनें लगती है. वही एक बहू है. प्रीति और रीति सगी बहने हैं और रामजी यादव की पुत्री हैं. वही सोनम कुमारी विजय यादव की पुत्री है. रुधा कुमारी लखन यादव की बेटी है. सिंकु कुमारी सिकंदर यादव की बहू है. सिंकु कुमारी के पति का नाम मनीष कुमार है. वही, रूधा कुमारी के पिता लखन यादव भी झारखंड पुलिस में है.

छोटे से गांव में लिखी बड़ी कहानी 

इस परिवार के सिकंदर यादव बताते हैं, कि हमारे परिवार की पांच बेटियों ने यह सफलता पाई है. हमारा परिवार बंगाल महतो का परिवार है. जो सफल हुए उसमें चार बहनें है और एक बहू है. तीन परिवार से चार बहने हैं और एक परिवार से एक बहू है, जो कि सफल हुई है. सभी ने काफी मेहनत किया. इस छोटे से गांव का नाम रोशन हुआ है. आज पूरा बिहार इस गांव का नाम जान रहा है. पहले हमारे पूर्वज का नाम बंगाल महतो था, उन्हीं के नाम से या बंगाल बीघा गांव हुआ. यहां आज इस छोटे से गांव में यह सफलता एक बड़ी कहानी कह रही है.

यहां एक सरकारी स्कूल तक नहीं

वही, इस संबंध में इसी परिवार के प्रमोद यादव बताते हैं, कि इस परिवार में पांच बेटियों ने सफलता पाई है. इसमें चार मेरी बुआ लगती है. वही, एक भभु लगती है. सभी ने खुद से मेहनत कर पढ़ाई की. जब बिहार पुलिस की परीक्षा में उत्तीर्ण हो गए, तो फिजिकल की तैयारी के लिए यहां से 30 किलोमीटर दूर बोधगया जाने लगी. वहां जाकर फिजिकल की तैयारी में काफी पसीना बहाया और फिर 27 को रिजल्ट आया, तो खुशी का ठिकाना नहीं है. इस परिवार की पांच बेटियों ने सफलता पाई है. बिहार पुलिस में चयनित हो गई है. खुशी की बात यह भी है, कि अब इस परिवार में पहले जहां बेटे को ही ज्यादा पढ़ाया लिखाया, दुलार प्यार किया जाता था, बेटियों को यह सब कम मिलता था, किंतु अब स्थिति बदली है. अब बेटियां भी काफी आगे आ रही है. बेटियों को भी परिवार से प्रोत्साहन मिल रहा है और यही वजह है कि इन पांच बेटियों ने बिहार पुलिस में परचम लहराया है. 20 साल पहले इस परिवार में इक्के-दुक्के लोग नौकरी में होते थे. आज दर्जनों नौकरियों में है. एक अदद सरकारी स्कूल नहीं है. फिर भी सफलता की कहानी लिखी जा रही है. यह एक बड़ी मिसाल है. हमारे परिवार के वर्तमान में 20 से 25 घर हैं. पहले एक घर हुआ करता था. धीरे-धीरे बंटवारा होते-होते वंश बढ़ते -बढ़ते 20 से 25 घर हुए. 100 से अधिक की जनसंख्या हमारे परिवार की है और अब एक मिसाल है, कि हमारे परिवार को नौकरी वाला खानदान के रूप में पहचान मिलने लगी है. हमारे गांव से तीन-चार किलोमीटर दूर एक विदेशी संस्थान का सुजाता स्कूल है. सुजाता स्कूल से भी हम लोगों को पढ़ने का अच्छा मौका मिला. हालांकि हमारे गांव में शिक्षा की अलख हमारे परिवार के ही रामबली यादव ने जगाई थी और तब से हमारे गांव में नौकरियों का सिलसिला जो शुरू हुआ, वह अब थम नहीं रहा है. लगातार हमारे परिवार के लोग सरकारी नौकरियों में जा रहे हैं. अभी पांच बेटियां बिहार पुलिस में चयनित हुई है. इससे पहले भी हमारे परिवार के लोग जेसीओ (फौज) में, इंजीनियर, रेलवे, ग्रुप डी, शिक्षण समेत अन्य नौकरियों में है. हम लोगों को खुद पर और पूरे परिवार पर नाज है.

सफल बेटियों ने बताया 

सफल छात्रा प्रीति कुमारी ने बताया की ऑनलाइन पढ़ाई करते थे. हमें भरोसा था कि मेहनत से पढ़ाई कर रहे हैं, सफलता मिलेगी और जब बिहार पुलिस की परीक्षा का रिजल्ट आया, तो उसमें हम लोग सभी पांच सफल हुए. हम लोग एक दूसरे के सपोर्ट से तैयारी करते थे. घर का काम भी और पढ़ाई भी, दोनों साथ-साथ चलती थी. आखिरकार हमें सफलता मिली. वहीँ सफल छात्रा प्रीति कुमारी ने बताया की यहां सरकारी स्कूल भी नहीं है. घर का काम भी थोड़ा बहुत करती थी. पढ़ाई एक संस्थान के स्कूल से किसी तरह शुरू हुई थी. सपना था, कि कुछ बनूं. आज सपने पूरे हो रहे हैं  अब हमारे परिवार को हम लोगों पर नाज है. सिकंदर यादव की बहू सिंकू कुमारी ने बताया की 2024 से तैयारी कर रही थी. मायके से भी सपोर्ट मिला और ससुराल से भी सपोर्ट मिला. मायके गई, तो वहां भी पढी और ससुराल आई तो यहां भी पढी. पूरी पढ़ाई ऑनलाइन की और सफल हुई. अब काफी अच्छा लग रहा है. पटना में मेरी पोस्टिंग हुई है. जबकि सफल छात्रा रूधा कुमारी ने बताया की बारहवीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद नौकरी के लिए फॉर्म भरा करती थी. इस बीच बिहार पुलिस में बहाली के लिए फॉर्म भरी थी. हमारे परिवार की पांच बेटियां मिलकर इसकी तैयारी कर रहे थे. सभी साथ में पढ़ते पढ़ते थे और सभी सफल भी हो गए. पहले लोगों की धारणा थी, कि बेटियां नहीं पढ सकती हैं. घर के ही काम कर सकती हैं. किंतु अब सोच बदली है. अब लड़कियां लड़कों के साथ-साथ काम करती है, नौकरियां करती हैं. हर काम लड़कियां कर सकती हैं. अब अभिभावक भी बेटियों को पढ़ाते हैं. मेरे पिताजी झारखंड में पोस्टेड है. हर किसी का सपना पापा की तरह बनना होता है, तो मेरा यह सपना पूरा हुआ है. हम लोग एक परिवार से पांच बिहार पुलिस में चयनित हुए है. यह काफी गर्व की बात है. वही, सोनम कुमारी बताती है, कि हर चुनौती को मात देकर इस परीक्षा में सफलता पाई है. बिहार पुलिस में चयन हुआ, तो काफी खुशी है. पूरा परिवार खुश है. एक परिवार की पांच बेटियों ने सफलता पाई है, तो एक बहुत बड़ी बात है और हम लोगों को भी खुद पर नाज महसूस हो रहा है.

मनोज की रिपोर्ट