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रुसी परिवार पहुंचा गयाजी, रूस-यूक्रेन युद्ध में शहीद हुए अपने परिजन की आत्मा की शांति के लिए किया पिंडदान

Bihar News : गया जी के फल्गू नदी में पिंडदान के प्रति अब विदेशी लोगों में भी आस्था बढ़ने लगी है। आज रुस से एक परिवार गयाजी पहुंचा और यूक्रेन के साथ युद्ध में शहीद हुए अपने परिजन की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान किया.....

रुसी परिवार पहुंचा गयाजी, रूस-यूक्रेन युद्ध में शहीद हुए अपन
गयाजी में रुसी परिवार ने किया पिंडदान- फोटो : मनोज कुमार

Gayaji : मोक्ष और ज्ञान की भूमि गयाजी की आध्यात्मिक महत्ता एक बार फिर सात समंदर पार तक देखने को मिली है। वैश्विक स्तर पर जारी रूस-यूक्रेन युद्ध की विभीषिका के बीच, फल्गु नदी के पवित्र तट पर एक ऐसा भावुक कर देने वाला नजारा सामने आया जिसने हर किसी की आंखें नम कर दीं। रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे भीषण युद्ध में शहीद हुए अपने एक परिजन की आत्मा की शांति और मोक्ष प्राप्ति के लिए रूस से आए एक परिवार ने सनातन धर्म के रीति-रिवाजों के अनुसार गयाजी में विधिवत पिंडदान और तर्पण किया।

बहन और बहनोई ने भारतीय संस्कृति और वैदिक परंपरा के साथ किया पिंडदान

मिली जानकारी के अनुसार, रूस-यूक्रेन युद्ध में अग्रिम मोर्चे पर लड़ते हुए रूसी सेना के जवान 'फेस टू बाल गए' शहीद हो गए थे। जवान की असमय मौत से पूरा परिवार गहरे सदमे और शोक में था। मृत आत्मा को सदगति दिलाने और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना लेकर शहीद जवान की बहन ललिता राधा रानी फेस, उनके पति (जीजा) सुंदरा फेस और अपनी छोटी बच्ची के साथ विशेष रूप से बिहार के गयाजी पहुंचे। युद्ध की विभीषिका को पीछे छोड़, इस विदेशी परिवार ने फल्गु तट पर बैठकर भारतीय संस्कृति और वैदिक परंपरा को पूरी श्रद्धा के साथ अपनाया।

फल्गु नदी के देवघाट पर पिंडदान की यह पूरी प्रक्रिया स्थानीय तीर्थ पुरोहित कुमार गौरव की देखरेख में संपन्न हुई। पुरोहितों ने पूरी निष्ठा के साथ विदेशी श्रद्धालुओं को कुश, तिल, जौ और पिंड के माध्यम से तर्पण की विधि पूरी कराई। इस दौरान घाट पर चारों ओर गूंज रहे वैदिक मंत्रोच्चार और अपनी गोद में बैठी मासूम बच्ची के साथ शहीद भाई को श्रद्धांजलि देते हुए बहन ललिता और उनका परिवार बेहद भावुक नजर आया।

बहन-बहनोई से रुंधे गले से साझा की अपनी पीड़ा

मीडिया से बातचीत करते हुए शहीद जवान के जीजा सुंदरा फेस ने बेहद रुंधे गले से अपनी पीड़ा साझा की। उन्होंने कहा, "रूस-यूक्रेन युद्ध में मेरे साले की शहादत के बाद हमारा पूरा परिवार भीतर से टूट गया था। हमने भारत और खासकर गयाजी की धार्मिक व मोक्षदायिनी मान्यताओं के बारे में सुन रखा था कि यहाँ पिंडदान करने से मृत आत्मा को जन्म-मरण के बंधन से मुक्ति मिलती है।" उन्होंने आगे बताया कि वे गयाजी की इस पावन धरती पर अपने साले के साथ-साथ अपने दिवंगत पिता की आत्मा की शांति के लिए भी पिंडदान कर रहे हैं, ताकि उनकी भटकती आत्मा को परम शांति मिले और उनके परिवार में दोबारा खुशहाली और मानसिक शांति लौट सके।

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गयाजी में पिंडदान का पूरे विश्व में बजता है डंका

तीर्थ पुरोहित कुमार गौरव ने बताया कि गयाजी की आध्यात्मिक और धार्मिक महत्ता सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका डंका पूरे विश्व में बजता है। यही कारण है कि इस रूसी परिवार ने सनातन पद्धति पर अटूट विश्वास जताते हुए इतनी दूर आकर पिंडदान का फैसला किया। गौरतलब है कि मोक्षभूमि गया में हर साल देश के कोने-कोने के अलावा रूस, अमेरिका, जर्मनी और यूरोप के कई देशों से विदेशी श्रद्धालु अपने पूर्वजों और प्रियजनों के उद्धार के लिए पिंडदान करने आते हैं, जो भारत की सनातन संस्कृति की वैश्विक स्वीकार्यता को दर्शाता है।


मनोज कुमार की रिपोर्ट