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Bihar News:RTI का बड़ा खुलासा! दरभंगा एम्स अब भी मंजूरी के इंतजार में, 2006 करोड़ की परियोजना में 1 फीसदी से भी कम राशि खर्च

Bihar News: बिहार में दूसरे एम्स की घोषणा हुए लगभग एक दशक और निर्माण स्थल तय हुए करीब छह वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन परियोजना की रफ्तार अब भी सवालों के घेरे में है।...

RTI Shocker Darbhanga AIIMS Awaits Approval Funds Unused
दरभंगा एम्स अब भी मंजूरी के इंतजार में- फोटो : reporter

Bihar News: मिथिलांचल की बहुप्रतीक्षित स्वास्थ्य परियोजना दरभंगा एम्स को लेकर आरटीआई से चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है। बिहार में दूसरे एम्स की घोषणा हुए लगभग एक दशक और निर्माण स्थल तय हुए करीब छह वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन परियोजना की रफ्तार अब भी सवालों के घेरे में है। ताजा आरटीआई जवाब के अनुसार, 2006 करोड़ रुपये की संशोधित लागत वाली इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर अब तक 1 प्रतिशत से भी कम राशि खर्च हुई है, जबकि अस्पताल के प्रमुख निर्माण कार्यों को अभी तक अंतिम मंजूरी भी नहीं मिली है।

दरअसल, वर्ष 2015 में तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने पटना के बाद बिहार के दूसरे एम्स के रूप में दरभंगा एम्स की घोषणा की थी। इसके बाद 2020 में केंद्रीय कैबिनेट ने परियोजना को मंजूरी दी और 13 नवंबर 2024 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भूमि पूजन कर इसकी आधारशिला रखी। 187 एकड़ से अधिक भूमि पर बनने वाली इस परियोजना की प्रारंभिक लागत 1264 करोड़ रुपये निर्धारित की गई थी, जो अब बढ़कर 2006 करोड़ रुपये हो चुकी है।

आरटीआई के तहत निर्माण एजेंसी एचएससीसी ने बताया है कि अस्पताल भवन, शैक्षणिक ब्लॉक, आवासीय परिसर और अन्य प्रमुख ढांचागत कार्यों को अभी मंजूरी मिलना बाकी है। एजेंसी के अनुसार, इन कार्यों की शुरुआत स्वीकृति मिलने के बाद ही होगी। यह स्थिति तब है जब परियोजना का कई बार सार्वजनिक मंचों से उल्लेख किया जा चुका है और शिलान्यास भी हो चुका है।विपक्ष ने इस मुद्दे को लेकर सरकार पर निशाना साधा है। स्थानीय राजद नेता प्रेमचंद उर्फ भोलू यादव ने आरोप लगाया कि दरभंगा एम्स को वर्षों से चुनावी मुद्दे के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। उनका दावा है कि अब तक केवल प्रवेश द्वार और सीमित बुनियादी कार्य ही हुए हैं, जबकि परियोजना की वास्तविक प्रगति बेहद धीमी है।हालांकि, राज्यसभा सांसद धर्मशिला गुप्ता ने कहा कि निर्माण कार्य प्रगति पर है। उनके अनुसार, भूमि समतलीकरण, मिट्टी भराई, बाउंड्री और गेट निर्माण का काम जारी है तथा केंद्र और राज्य सरकार लगातार इसकी समीक्षा कर रही है।

आरटीआई के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2024-25 में मात्र 21.33 लाख रुपये और 2025-26 में 19.18 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। कुल मिलाकर लगभग 19.39 करोड़ रुपये ही खर्च किए गए हैं, जो संशोधित लागत का 1 प्रतिशत भी नहीं है। ऐसे में जुलाई 2029 तक एम्स के पूरी तरह चालू होने के दावे पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। मिथिलांचल के लाखों लोगों की उम्मीदों से जुड़ी यह परियोजना फिलहाल वादों, घोषणाओं और मंजूरियों के बीच उलझी नजर आ रही है।

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रिपोर्ट- वरुण कुमार ठाकुर