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Bihar News : भागलपुर सदर अस्पताल में PM CARES से बना ऑक्सीजन प्लांट ताले में बंद, बाहर से सिलेंडर रिफिल कराने को मजबूर अस्पताल प्रबंधन

Bihar News : भागलपुर सदर अस्पताल में ऑक्सीजन प्लांट के शेड के मुख्य गेट पर ताला लटका हुआ है। नए बने मॉडल अस्पताल भवन में जो ऑक्सीजन पाइपलाइन बिछाई गई है, उसका कनेक्शन इस प्लांट से नहीं जोड़ा गया है।

Bihar News : भागलपुर सदर अस्पताल में PM CARES से बना ऑक्सीजन
ओक्सिजन की समस्या - फोटो : BALMUKUND

BHAGALPUR : कोरोना काल में ऑक्सीजन की कमी से मची त्रासदी को देखते हुए केंद्र सरकार की ओर से PM CARES फंड के तहत देश के सरकारी अस्पतालों में मेडिकल ऑक्सीजन प्लांट स्थापित किए गए थे। इसी क्रम में भागलपुर सदर अस्पताल परिसर में भी मेडिकल ऑक्सीजन प्लांट लगाया गया। प्लांट के बाहर लगे बोर्ड के अनुसार इसकी फंडिंग PM CARES से हुई, जबकि इसे L&T ने क्रियान्वित किया और DRDO ने डिजाइन एवं विकसित किया। उद्देश्य स्पष्ट था—अस्पताल में ऑक्सीजन की जरूरत पड़ने पर मरीजों को निर्बाध आपूर्ति उपलब्ध कराना और बाहरी स्रोतों से ऑक्सीजन मंगाने पर निर्भरता कम करना। लेकिन वर्तमान स्थिति इस उद्देश्य के क्रियान्वयन पर सवाल खड़े कर रही है।

प्लांट के गेट पर ताला, पाइपलाइन से कनेक्शन का इंतजार

सदर अस्पताल परिसर में स्थापित ऑक्सीजन प्लांट के संरक्षित शेड के गेट पर ताला लगा हुआ है। वहीं, उपलब्ध जानकारी के अनुसार नए मॉडल अस्पताल भवन में बिछाई गई ऑक्सीजन पाइपलाइन का कनेक्शन अब तक इस प्लांट से नहीं जोड़ा गया है। ऐसे में सवाल उठता है कि अस्पताल परिसर में ऑक्सीजन उत्पादन की सुविधा मौजूद होने के बावजूद मरीजों तक इसका लाभ पूरी तरह क्यों नहीं पहुंच पा रहा है।

प्लांट मौजूद, फिर भी जंबो सिलेंडरों की रिफिलिंग पर खर्च

सबसे बड़ा सवाल जंबो ऑक्सीजन सिलेंडरों को लेकर है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार प्लांट से जंबो सिलेंडरों की रिफिलिंग नहीं हो रही है। जरूरत पड़ने पर अस्पताल को सिलेंडर बाहर से भरवाने पड़ रहे हैं। यानी एक ओर परिसर में ऑक्सीजन उत्पादन के लिए प्लांट स्थापित है, वहीं दूसरी ओर ऑक्सीजन सिलेंडरों की रिफिलिंग पर सरकारी राशि खर्च हो रही है। ऐसे में यह जानना जरूरी हो जाता है कि प्लांट की क्षमता का इस्तेमाल क्यों नहीं हो पा रहा है और इसे अस्पताल की ऑक्सीजन सप्लाई व्यवस्था से जोड़ने में अब तक क्या बाधा है।

नि:शुल्क सुविधा का बोर्ड, लेकिन व्यवस्था पर सवाल

प्लांट के समीप लगे सूचना बोर्ड पर सदर अस्पताल में विभिन्न सुविधाएं नि:शुल्क उपलब्ध होने की जानकारी दी गई है। वहीं मेडिकल ऑक्सीजन प्लांट के बोर्ड पर PM CARES, L&T और DRDO से जुड़ी जानकारी अंकित है। इन तमाम व्यवस्थाओं के बीच अब अस्पताल प्रबंधन के सामने यह सवाल है कि स्थापित ऑक्सीजन प्लांट को पूरी क्षमता के साथ कब तक उपयोग में लाया जाएगा।

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लगातार निरीक्षण के बावजूद कनेक्शन का इंतजार

सदर अस्पताल का समय-समय पर जिलाधिकारी अलंकृता पांडे समेत वरीय प्रशासनिक एवं स्वास्थ्य अधिकारियों द्वारा निरीक्षण किया जाता रहा है। बीते दिनों भी सदर अस्पताल का निरीक्षण किया गया था। इसके बावजूद ऑक्सीजन प्लांट को अस्पताल की पाइपलाइन से जोड़कर नियमित संचालन की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है।

अधिकारी बोले—कनेक्शन के बाद जल्द शुरू होगा प्लांट

इस संबंध में जिला कार्यक्रम पदाधिकारी मणिभूषण झा ने बताया कि नए मॉडल अस्पताल भवन के विभिन्न हिस्सों में ऑक्सीजन आपूर्ति के लिए पाइपलाइन लगाई गई है, लेकिन उसका कनेक्शन अभी ऑक्सीजन प्लांट से नहीं जोड़ा गया है। हाल के दिनों में BMSICL के जीएम द्वारा भी स्थल का निरीक्षण किया गया है। निरीक्षण के बाद कनेक्शन का काम पूरा कर प्लांट को जल्द संचालित किए जाने की संभावना है। अब सवाल यही है कि कोरोना जैसी आपदा में मरीजों की जिंदगी बचाने के उद्देश्य से लगाया गया ऑक्सीजन प्लांट कब तक ताले में बंद रहेगा? और कब सदर अस्पताल के मरीजों को इसका वास्तविक और पूर्ण लाभ मिल सकेगा? साथ ही, जब तक प्लांट पूरी तरह चालू नहीं होता, तब तक बाहर से जंबो सिलेंडर भरवाने पर हो रहे सरकारी खर्च की व्यवस्था और उसकी आवश्यकता को लेकर भी स्थिति स्पष्ट किए जाने की जरूरत है।

बालमुकुन्द की रिपोर्ट