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Bihar crime politics:कनबुच्चा vs रामधनी, 2023 से चल रही खूनी अदावत का एनकाउंटर में हुआ अंत , पढ़िए बिहार में अपराध का काला तिलिस्म

Bihar crime politics: नगर परिषद की सत्ता दो धड़ों-कनबुच्चा यादव गिरोह और रामधनी यादव गिरोह के बीच लंबे समय से बंटी हुई थी। पिछले तीन महीनों से रामधनी यादव की कमाई के सभी रास्ते घाट, सैरात और पार्किंग से होने वाली आमदनी पर रोक लग गई थी। इससे उसके....

Bhagalpur Ramdhani Yadav killed in encounter exposes crime p
पावर, पैसा और पॉलिटिक्स का घमासान- फोटो : reporter

Bihar crime politics:बिहार के भागलपुर ज़िले के सुल्तानगंज में हुए सनसनीखेज गोलीकांड का आखिरकार खून से सना अंजाम सामने आ गया है। इस कांड के मुख्य अभियुक्त रामधनी यादव की पुलिस मुठभेड़ में मौत हो गई, लेकिन इस एनकाउंटर के बाद अब जो परतें खुल रही हैं, उन्होंने पूरे इलाके की सियासत और अपराध के गठजोड़ को बेनकाब कर दिया है।

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, रामधनी यादव को घटना में इस्तेमाल हथियार और अन्य सबूतों की बरामदगी के लिए ले जाया जा रहा था। इसी दौरान उसने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर पुलिस टीम पर अचानक फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने भी मोर्चा संभाला और इस भीषण मुठभेड़ में रामधनी गंभीर रूप से घायल हो गया। अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इस फायरिंग में तीन पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं।

लेकिन कहानी सिर्फ एनकाउंटर तक सीमित नहीं है, असल अदावत की जड़ें सुल्तानगंज की सियासी और आर्थिक सत्ता के तिलिस्म में छिपी हैं। स्थानीय जानकारों के मुताबिक, नगर परिषद की सत्ता दो धड़ों-कनबुच्चा यादव गिरोह और रामधनी यादव गिरोह के बीच लंबे समय से बंटी हुई थी। एक बुजुर्ग स्थानीय व्यक्ति के अनुसार, जो भी अधिकारी यहां आता था, उसे पहले ही दो ध्रुवों की हकीकत समझा दी जाती थी। अगर दोनों गुटों से तालमेल बैठा लिया जाए तो काम आसान, वरना टकराव तय माना जाता था।

सूत्रों के अनुसार, पिछले तीन महीनों से रामधनी यादव की कमाई के सभी रास्ते घाट, सैरात और पार्किंग से होने वाली आमदनी पर रोक लग गई थी। इससे उसके आर्थिक और राजनीतिक दबदबे को बड़ा झटका लगा था। बताया जाता है कि नगर परिषद में अब कनबुच्चा यादव का प्रभाव तेजी से बढ़ रहा था, जिससे शक्ति संतुलन पूरी तरह बदल गया।

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यही नहीं, 2023 से दोनों गुटों के बीच खूनी संघर्ष पहले से ही जारी था। 24 फरवरी 2023 को रामधनी यादव पर जानलेवा हमला हुआ था और 5 नवंबर 2023 को रंजीत यादव पर भी हमला किया गया था। दोनों घटनाओं में एक-दूसरे के गिरोह पर आरोप लगे थे, जिससे रंजिश और गहरी होती चली गई। स्थानीय लोगों का कहना है कि नगर परिषद सुल्तानगंज अब अपराध और सत्ता के गठजोड़ का अड्डा बनता जा रहा था। घाट की वसूली से लेकर पार्किंग और सैरात तक हर आर्थिक स्रोत पर वर्चस्व की लड़ाई ने हालात को विस्फोटक बना दिया था।

इस ताज़ा एनकाउंटर के बाद प्रशासन पर भी सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह सिर्फ एक अपराधी का अंत था या फिर लंबे समय से चल रहे सत्ता-अपराध के नेटवर्क का पहला बड़ा ब्रेकडाउन। फिलहाल इलाके में तनाव और सन्नाटा दोनों साथ-साथ हैं, लेकिन एक बात साफ है सुल्तानगंज की यह अदावत अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है, बल्कि इसकी परछाइयाँ अभी और कई परतें खोल सकती हैं।

रिपोर्ट- अंजनी कुमार कश्यप