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Bhagalpur Ghat: विक्रमशिला पुल क्षतिग्रस्त होने से घाटों पर भारी भीड़ , भागलपुर में नाव बनी एकमात्र सहारा

Bhagalpur Ghat: विक्रमशिला पुल क्षतिग्रस्त होने के बाद भागलपुर में नाव ही सहारा बनी, घाटों पर भारी भीड़ और अव्यवस्था से लोगों को परेशानी हो रही है।

Bhagalpur Ghat
विक्रमशिला पुल- फोटो : news4nation

Bhagalpur Ghat: विक्रमशिला पुल के क्षतिग्रस्त होने के बाद भागलपुर, नवगछिया और सीमांचल क्षेत्र के बीच सड़क संपर्क बुरी तरह प्रभावित हो गया है। इसके चलते गंगा पार करने के लिए अब नाव ही लोगों का मुख्य सहारा बन गई है, जिससे नदी किनारे के घाटों पर भारी भीड़ और अव्यवस्था की स्थिति बन गई है।

महादेवपुर घाट से बरारी घाट और तिनटंगा करारी घाट से कहलगांव के बीच रोजाना बड़ी संख्या में यात्री नाव के जरिए आवाजाही कर रहे हैं। सुबह और शाम के समय यहां यात्रियों की भीड़ काफी बढ़ जाती है, जिससे लोगों को लंबा इंतजार और असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।

महादेवपुर घाट पर दबाव

सबसे ज्यादा दबाव महादेवपुर घाट पर देखा जा रहा है, जहां नाविकों के बीच अधिक यात्रियों को बैठाने और ज्यादा चक्कर लगाने की होड़ मची हुई है। प्रशासन के निर्देशों के बावजूद कई नावों में क्षमता से अधिक सवारियां बैठाई जा रही हैं, जिससे सुरक्षा को लेकर गंभीर खतरा बना हुआ है। कई बार जल्दबाजी में यात्रियों के चढ़ने-उतरने के दौरान नाव का संतुलन भी बिगड़ जाता है।

अव्यवस्था के बीच यात्री परेशान

स्थिति यह है कि घाट पर एक नाविक दूसरे नाविक की सवारी को भी अपनी नाव में बैठाने की कोशिश करता नजर आता है, जिससे अफरा-तफरी का माहौल बना रहता है। यात्री इस अव्यवस्था के बीच परेशान हैं और प्रशासनिक नियंत्रण कमजोर दिख रहा है। पुलिस बल और आपदा मित्र लगातार भीड़ को संभालने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन हालात पर पूरी तरह काबू नहीं पाया जा सका है।

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संकट का असर स्थानीय कारोबार कर

सुबह और शाम के समय स्थिति और भी गंभीर हो जाती है, जब नौकरीपेशा लोग, विद्यार्थी और अन्य यात्री समय पर पहुंचने की जल्दी में घाटों पर जमा हो जाते हैं। इससे महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को सबसे ज्यादा परेशानी उठानी पड़ रही है। कई लोग मजबूरी में जान जोखिम में डालकर नाव से यात्रा कर रहे हैं। इस संकट का असर स्थानीय कारोबार, सब्जी विक्रेताओं और स्वास्थ्य सेवाओं पर भी पड़ रहा है, जिससे आम जनजीवन प्रभावित हो गया है।

Bhagalpur से balmukund kumar कि रिपोर्ट