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आस्था का अनोखा सफर, साइकिल से हजारों किमी तय कर बाबा बैद्यनाथ के दरबार पहुंचे शिवभक्त असीम

श्रावणी मेले की शुरुआत होते ही सुल्तानगंज से देवघर तक के कच्ची कांवरिया पथ पर भक्ति के अनगिनत और अनोखे रंग देखने को मिल रहे हैं। कोई नंगे पांव यात्रा कर रहा है, तो कोई दंडवत प्रणाम करते हुए आगे बढ़ रहा है.....

आस्था का अनोखा सफर, साइकिल से हजारों किमी तय कर बाबा बैद्यना
आस्था का अनोखा सफर- फोटो : इम्तियाज खान

Sultanganj/Deoghar : बाबा भोलेनाथ की महिमा अपरंपार है और उनके भक्तों की श्रद्धा भी उतनी ही अटूट है। श्रावणी मेले की शुरुआत होते ही सुल्तानगंज से देवघर तक के कच्ची कांवरिया पथ पर भक्ति के अनगिनत और अनोखे रंग देखने को मिल रहे हैं। कोई नंगे पांव यात्रा कर रहा है, तो कोई दंडवत प्रणाम करते हुए आगे बढ़ रहा है। इसी बीच एक ऐसे शिवभक्त की यात्रा चर्चा का विषय बनी हुई है, जो अपनी साइकिल से हजारों किलोमीटर का कठिन सफर तय कर बाबा के दरबार की ओर बढ़ रहे हैं।

दस दिनों से जारी है अनोखी साइकिल यात्रा 

पश्चिम बंगाल के कोलकाता (दमदम) के रहने वाले 30 वर्षीय असीम विश्वास पिछले दस दिनों से लगातार साइकिल पर अपनी धार्मिक यात्रा कर रहे हैं। वे कोलकाता से रवाना होकर पहले सिलीगुड़ी और जलपाईगुड़ी पहुंचे, जिसके बाद साइकिल से ही सुल्तानगंज आए। यहां उत्तरवाहिनी गंगा से पवित्र जल भरकर वे अब बाबा बैद्यनाथ धाम में जलार्पण करने के लिए पूरी श्रद्धा के साथ देवघर की ओर प्रस्थान कर चुके हैं।

विश्व कल्याण और चार धाम यात्रा का संकल्प 

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असीम विश्वास का कहना है कि यह केवल एक साधारण यात्रा नहीं है, बल्कि उनकी चार धाम की आध्यात्मिक यात्रा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसे वे पूरी तरह साइकिल से ही पूरा कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस कठिन सफर का उद्देश्य किसी निजी मनोकामना या इच्छा की पूर्ति नहीं, बल्कि भगवान शिव के प्रति निश्छल भक्ति और पूरे विश्व के कल्याण की कामना करना है।

थकान और कठिन रास्तों पर भारी पड़ी अटूट श्रद्धा 

हजारों किलोमीटर लंबे कठिन रास्ते, मौसम की मार और लगातार साइकिल चलाने की थकान भी असीम के विश्वास और भक्ति के आगे छोटी साबित हुई है। बाबाधाम में बाबा बैद्यनाथ को जल चढ़ाने के बाद वे पश्चिम बंगाल स्थित प्रसिद्ध शक्तिपीठ तारापीठ के दर्शन के लिए रवाना होंगे और फिर वहां से अपने घर लौटेंगे। उनकी इस अनोखी और निस्वार्थ यात्रा को देखकर कांवरिया पथ पर चलने वाले अन्य श्रद्धालु भी काफी प्रेरित हो रहे हैं।

समर्पण और विश्वास की मिसाल बने 

असीम श्रावणी मेले में हर साल श्रद्धालुओं के भक्ति भाव के कई रूप देखने को मिलते हैं, लेकिन साइकिल से इतनी लंबी और कठिन यात्रा तय करना समर्पण की एक अनूठी मिसाल है। असीम विश्वास की यह शिव यात्रा समाज को यही संदेश देती है कि यदि मन में सच्चा विश्वास और ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण हो, तो राह की कोई भी मंजिल या कठिनाई बड़ी नहीं होती।

इम्तियाज की रिपोर्ट