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भागलपुर के बरारी घाट पर जीविका दीदियों की अनूठी पहल, मात्र 50 रुपये में श्रद्धालुओं को मिलेगा घर जैसा शुद्ध भोजन

जीविका दीदियों ने किफायती दरों पर सेवा की नई मिसाल पेश की है। इनके द्वारा बरारी घाट पर आने वाले श्रद्धालुओं को मात्र 50 रुपये में घर जैसा शुद्ध भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है.....

भागलपुर के बरारी घाट पर जीविका दीदियों की अनूठी पहल, मात्र 5
जीविका दीदियों की अनूठी पहल- फोटो : बाल मुकुंद कुमार

Bhagalpur : जिले के ऐतिहासिक बरारी गंगा घाट पर इन दिनों श्रद्धा और भक्ति के साथ-साथ सेवा की एक नई बयार बह रही है। बिहार की महिलाओं को सशक्त बनाने के उद्देश्य से संचालित 'जीविका' मिशन के तहत यहां एक सार्वजनिक रसोई की शुरुआत की गई है। इस रसोई के माध्यम से गंगा स्नान और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं और राहगीरों को अब बेहद किफायती दरों पर शुद्ध, स्वच्छ और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे उन्हें महंगे होटलों से बड़ी राहत मिली है।

इस रसोई की बागडोर 'गंगा जीविका स्वयं सहायता समूह' की लक्ष्मी देवी और उनकी साथी महिलाओं के हाथों में है। लक्ष्मी देवी ने बताया कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य लोगों की सेवा के साथ-साथ समूह की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना है। आज के महंगाई के दौर में जहां बाहर खाना खाना आम आदमी की जेब पर भारी पड़ता है, वहीं जीविका की यह रसोई मात्र 50 रुपये में भरपेट शाकाहारी भोजन परोस रही है। इस थाली में चावल, दाल, सब्जी, पापड़ और सलाद शामिल है, जिसे पूरी तरह घरेलू स्वाद और स्वच्छता के साथ तैयार किया जाता है।

भोजन के साथ-साथ यहां बिहार के पारंपरिक व्यंजनों का भी पूरा ख्याल रखा गया है। मेनू चार्ट के अनुसार, बिहार की मशहूर 'लिट्टी-चोखा' की प्लेट मात्र 20 रुपये में उपलब्ध है, जिसमें दो पीस लिट्टी और चटनी दी जाती है। इसके अलावा, स्थानीय लोगों का पसंदीदा नाश्ता चूड़ा फ्राई और घुघनी 30 रुपये प्रति प्लेट की दर से मिल रहा है। शाम के समय गंगा किनारे का आनंद लेने वालों के लिए 25 रुपये में गरमा-गरम प्याज पकौड़ा और 10 रुपये में ताजी चाय की व्यवस्था भी की गई है।

सेहत के प्रति जागरूक लोगों के लिए यहां बिहार का 'पावर ड्रिंक' कहा जाने वाला सत्तू का शरबत मात्र 20 रुपये प्रति गिलास उपलब्ध है। इसके साथ ही पानी की बोतल, बिस्किट और अन्य स्नैक्स एमआरपी पर ही बेचे जा रहे हैं। लक्ष्मी देवी के अनुसार, कल से शुरू हुई इस रसोई को पहले ही दिन से लोगों का जबरदस्त रिस्पॉन्स मिल रहा है। घाट पर आने वाले श्रद्धालु इस बात से बेहद खुश हैं कि उन्हें गंगा तट पर ही घर जैसा साफ-सुथरा और सस्ता भोजन मिल रहा है, जिससे उनके समय और पैसे दोनों की बचत हो रही है।

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जीविका के माध्यम से हो रहा यह बदलाव केवल भोजन परोसने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उन महिलाओं के बढ़ते आत्मविश्वास का प्रतीक है जो अब समाज की मुख्यधारा में अपनी पहचान बना रही हैं। बरारी घाट पर प्रदर्शित पारदर्शी दर तालिका ने अवैध वसूली और ऊंचे दामों पर रोक लगाकर आम जनता को बड़ी राहत दी है। स्थानीय प्रशासन और जनता के सहयोग से संचालित यह रसोई आत्मनिर्भरता और सेवा का एक उत्कृष्ट उदाहरण पेश कर रही है, जिसकी चर्चा अब हर श्रद्धालु की जुबान पर है।

बालमुकुंद की रिपोर्ट