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Bihar Flood: गंडक के कहर से कांप उठा सिसवा, कटाव रोकने में लापरवाही, विधायक बोले —अधिकारी इंतजार कर रहे हैं बर्बादी का, ताकि 'ज्यादा जेब' भर सकें

Bihar Flood: वाल्मीकिनगर गंडक बराज से तीन दिनों से लगातार 50,000 क्यूसेक से अधिक पानी छोड़े जाने के बाद गंडक नदी उफान पर है, और अब उसका विकराल रूप दिख रहा है...

Bihar Flood
कटाव रोकने में लापरवाही- फोटो : reporter

Bihar Flood: नेपाल की तराई में लगातार हो रही भारी बारिश ने अब बिहार में तबाही के संकेत देने शुरू कर दिए हैं। वाल्मीकिनगर गंडक बराज से तीन दिनों से लगातार 50,000 क्यूसेक से अधिक पानी छोड़े जाने के बाद गंडक नदी उफान पर है, और अब उसका विकराल रूप प चंपारण के योगापट्टी प्रखंड में सिसवा मंगलपुर पंचायत के सिसवा गांव को निगलने पर आमादा है।

गांव के समीप स्थित बाढ़ पूर्व तैयार किया गया कटावरोधी बांध लगभग 250 मीटर तक धंस चुका है, और कई जगह दरारें भी नजर आने लगी हैं। स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि जल संसाधन विभाग ने जियो बैग में बालू भरकर जगह-जगह रखा जरूर है, लेकिन धंसी हुई जगहों पर उसे नहीं डाला गया, जिससे हालात और बिगड़ते जा रहे हैं।

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ग्रामीण रामतीर्थ देवी, शिवपूजन मुखिया सहित कई लोगों ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द कटाव पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो सिसवा, मंगलपुर, खापटोला सहित कई गांव बाढ़ की चपेट में आ जाएंगे। कटाक्ष करते हुए ग्रामीण बोले कि मानो अधिकारी इंतजार कर रहे हैं कि नदी पहले घर काटे, फिर पांच बोरी डाल कर ‘ज्यादा खर्च’ दिखाया जाए।इस गंभीर स्थिति की सूचना मिलते ही लौरिया के विधायक विनय बिहारी विधानसभा सत्र छोड़ कटावस्थल पर पहुंचे। विधायक के पहुंचते ही जल संसाधन विभाग के एसडीओ और जेई भी घटनास्थल पर आनन-फानन में पहुंचे।

विधायक विनय बिहारी का बयान बेहद तीखा रहा। उन्होंने कहा कि कटावरोधी कार्य से हम बिल्कुल संतुष्ट नहीं हैं। अधिकारी शोभा की वस्तु की तरह जियो बैग भरकर किनारे रखे हैं, लेकिन जहां नदी जमीन निगल रही है, वहां कोई कार्रवाई नहीं हो रही। लगता है अधिकारी इंतजार कर रहे हैं कि नदी पहले काटे, तब जाकर खर्च दिखा सकें।उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि वे जल संसाधन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से बात करेंगे, और कटावरोधी कार्य को युद्धस्तर पर शुरू कराने की मांग रखेंगे।सवाल है कि  क्या सरकार तब जागेगी जब गांव डूबेंगे?या फिर यह भी एक 'आपदा में अवसर' की स्क्रिप्ट है,जहां जनता रोती है, और अफसर बजट गिनते हैं...

रिपोर्ट-आशिष कुमार