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कमज़ोर तफ्तीश और साक्ष्य की कमी: दहेज हत्या के 5 आरोपी बरी, कोर्ट में नहीं टिक सकी पुलिस की कहानी

कमज़ोर तफ्तीश और साक्ष्य की कमी: दहेज हत्या के 5 आरोपी बरी, क

Bettiah -:  बगहा पुलिस की लचर जांच और ठोस साक्ष्यों के अभाव के कारण दहेज हत्या के एक बड़े मामले में सभी पांचों आरोपी कानून की गिरफ्त से छूट गए हैं । सेमरा थाना क्षेत्र की इस चर्चित घटना में बगहा की एडीजे-4 अदालत ने पुलिस द्वारा पेश किए गए दस्तावेजों और गवाहों को अपर्याप्त मानते हुए आरोपियों को बाइज्जत बरी कर दिया ।

साक्ष्य जुटाने में विफल रही सेमरा थाना पुलिस

वर्ष 2017 में हुई पूनम देवी की संदिग्ध मौत के मामले में पुलिस शुरू से ही ठोस साक्ष्य जुटाने में नाकाम रही । अभियोजन पक्ष ने अदालत में आठ गवाह तो पेश किए, लेकिन वे पुलिस की कहानी को 'संदेह से परे' साबित नहीं कर सके । कोर्ट ने पाया कि पुलिस यह साबित करने में पूरी तरह विफल रही कि विवाहिता की मृत्यु और दहेज की मांग के बीच कोई सीधा संबंध था । 


एडीजे-4 अदालत ने पुलिसिया थ्योरी को नकारा

एडीजे-4 मानवेन्द्र मिश्र की अदालत ने सेशन ट्रायल संख्या 119/2018 की सुनवाई के दौरान पुलिसिया दावों में कई खामियां पाईं । अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल सामान्य आरोपों और कमज़ोर केस डायरी के आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता । इसके बाद कोर्ट ने माला देवी, कौशल्या देवी सहित सभी पांच आरोपितों को संदेह का लाभ देते हुए बरी करने का आदेश सुनाया । 

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कानून की कसौटी पर फेल हुई अभियोजन की दलील

बचाव पक्ष के वरिष्ठ अधिवक्ता कामरान अजीज ने कोर्ट में पुलिस की जांच पर गंभीर सवाल खड़े किए । उन्होंने दलील दी कि अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ कोई भी प्रत्यक्ष या ठोस सबूत पेश नहीं कर सका । पुलिस की इसी विफलता का लाभ आरोपियों को मिला और वे हत्या जैसे गंभीर आरोपों से मुक्त हो गए ।

हत्या और साक्ष्य मिटाने के आरोप नहीं हुए सिद्ध

पुलिस ने अपनी चार्जशीट में दावा किया था कि ससुराल पक्ष ने हत्या के बाद साक्ष्य मिटाने की कोशिश की थी, लेकिन अदालत में इनमें से एक भी आरोप पुलिस प्रमाणित नहीं कर पाई । 7 अगस्त 2017 की उस काली रात का सच क्या था, पुलिस की लचर जांच के कारण वह राज अब भी अनसुलझा रह गया है । 

पुलिस की कार्यप्रणाली पर खड़े हुए सवाल

दिनदहाड़े और चर्चित मामलों में भी जब पुलिस अदालत में ठोस सबूत नहीं रख पाती, तो न्याय प्रक्रिया पर सवाल उठने लगते हैं । इस फैसले के बाद आरोपियों के जमानत बंधपत्र तो मुक्त हो गए, लेकिन मृतका के परिवार के लिए न्याय की उम्मीद पुलिस की नाकामी की भेंट चढ़ गई ।

Report - Ashish, bettiah