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Bihar News : चंपारण की 17 वर्षीय फिजा बनीं युवाओं के लिए प्रेरणा, NEET में असफलता के बाद लिखी पहली किताब 'मेरी छोटी सी दुनिया'

Bihar News : पश्चिम चंपारण के 17 साल की फिजा परवीन ने अपनी पहली पुस्तक लिखकर समाज के सामने एक नई मिसाल कायम की है......पढ़िए आगे

Bihar News : चंपारण की 17 वर्षीय फिजा बनीं युवाओं के लिए प्र
फिजा बनीं प्रेरणा - फोटो : ASHISH

BETTIAH : पश्चिम चंपारण जिले के बगहा क्षेत्र से एक प्रेरणादायक खबर सामने आई है, जहाँ 17 साल की फिजा परवीन ने अपनी पहली पुस्तक लिखकर समाज के सामने एक नई मिसाल कायम की है। जिस उम्र में अधिकांश युवा सोशल मीडिया, नशे या अन्य भटकावों में उलझे रहते हैं, उस उम्र में फिजा ने अपनी सोच और कलम के दम पर अपनी एक अलग पहचान बनाई है। उनकी यह उपलब्धि आज पूरे क्षेत्र के युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बन गई है।

रामनगर नगर परिषद के नारायणपुर निवासी मोहम्मद फारूक की पुत्री फिजा परवीन की पहली पुस्तक "मेरी छोटी सी दुनिया – 17 साल, हजार जज्बात" हाल ही में ट्विन इंक पब्लिकेशन से प्रकाशित हुई है। 80 पन्नों की इस किताब में कुल 40 अध्याय शामिल हैं। फिजा ने अपनी कविताओं के माध्यम से जिंदगी के विभिन्न रंगों—संघर्ष, सपनों, खुशियों, दर्द, पारिवारिक रिश्तों और आत्मविश्वास को बेहद खूबसूरती से शब्दों में पिरोया है।

किताब में सामाजिक सोच और व्यक्तिगत अनुभवों को बहुत ही संवेदनशीलता के साथ उकेरा गया है। इसमें बड़ी बहन का महत्व, सच्ची दोस्ती, "मैं लड़की क्यों हूँ" जैसे सामाजिक सवाल, किशोरावस्था की चुनौतियाँ और हॉस्टल में रहकर पढ़ाई करने वाली छात्राओं के संघर्ष को विशेष स्थान दिया गया है। इसके अलावा, फिजा ने अपने जीवन में पिता के योगदान और खुद पर भरोसा रखने की अहमियत को भी अपनी रचनाओं के जरिए रेखांकित किया है।

लेखन की इस यात्रा के बारे में बात करते हुए फिजा ने बताया कि नीट (NEET) की परीक्षा में असफल होने के बाद उन्होंने अपने विचारों को पन्नों पर उतारना शुरू किया और लेखन का रास्ता चुना। उनकी माँ सैयद खातून एक सरकारी शिक्षिका हैं, जिन्होंने फिजा का हमेशा मार्गदर्शन किया। फिजा का कहना है कि यह उनकी पहली कोशिश है और यदि पाठकों का प्यार मिला, तो वह आगे भी कई किताबें लिखेंगी। उनका अगला सपना अपने गृह क्षेत्र चंपारण पर एक विशेष पुस्तक लिखने का है।

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फिजा की इस सफलता पर उनके परिवार के साथ-साथ पूरे बगहा और रामनगर क्षेत्र में खुशी की लहर है। स्थानीय लोगों और प्रबुद्ध नागरिकों ने फिजा की इस रचनात्मक उपलब्धि की सराहना करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है। फिजा की यह कहानी साबित करती है कि असफलता जीवन का अंत नहीं, बल्कि एक नए और बेहतर रास्ते की शुरुआत हो सकती है।

आशीष की रिपोर्ट