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Bihar News : औरंगाबाद में सरकारी उदासीनता का दंश झेल रहा जम्होर पुनपुन घाट, आश्वासन के बाद नहीं हो सका जीर्णोद्वार

Bihar News : औरंगाबाद में सरकारी उदासीनता का दंश झेल रहा जम्

AURANGABAD : औरंगाबाद के ऐतिहासिक स्थल जम्होर पुनपुन घाट आज सरकारी उदासीनता का दंश झेल रहा है। यह वह स्थल है जहाँ साल में 15 दिन के लिए रेलवे स्टेशन का निर्माण किया जाता है। मुगलसराय,रुट से हो कर गया जाने वाली सभी ट्रेन का यहाँ ठहराव होता है चाहे राजधानी ट्रेन ही क्यों न हो।  पितृ पक्ष मेला के वक्त, जिस समय दुनिया के हर कोने से लोग गया धाम आकर अपने पूर्वजों को पिण्ड दान करते है। जिसका वर्णन हिंदू शास्त्र में वर्णित है की गया श्राद्ध का प्रथम पिण्ड पुनपुन नदी के तट पर दिया जाता है। क्योंकि पुनपुन नदी ही गया धाम का प्रवेश द्वार माना जाता है। इसी आस्था को लेकर औरंगाबाद के जम्होर में पुनपुन तट पर सभी ट्रेनों का ठहराव होता है और पिण्ड दानी श्रद्धालु वहाँ रुकते है और प्रथम पिण्ड दान करते है। इसको लेकर 1880 के मौजूदा सरकार ने बजापते  रेलवे स्टेशन, टिकट घर, यात्रियों को ठहरने के लिए भव्य धर्मशाला तथा पुनपुन नदी का दोनो तटबंध को भी सीढ़ीनुमा निर्माण कराया था। हालाँकि  धर्मशाला आज भी अपनी अस्तित्व को सम्हाले ज्यों का त्यों खड़ा है और कुछ स्थल जैसे नदी का तटबंध ,टिकट घर आज खंडहर में तब्दील हो गया है। 

आजादी के बाद से इस पुरानी धरोहर पर किसी का ध्यान नही गया और धीरे धीरे यह  पौराणिक धरोहर राजनीति की भेंट चढ़ती चल गई। आपको यह भी बता दें 1947 से लेकर आज तक न तो उसकी देख रेख ही किया गया और नही कभी बिहार सरकार के द्वारा उसकी मरमत ही कराई गई। इस मामले को लेकर पुनपुन घाट के पुरोहित कुंदन पाठक से वार्ता किया गया तो उन्हों ने बताया की यह ऐतिहासिक पुनपुन पिण्ड दान घाट राजनैतिक उपेक्षा का शिकार हो गया है। 

उन्होंने यह भी  कहा कि हम आजाद भारत के गुलाम नागरिक है। आज यहाँ आवाम को देखने वाला कोई नही है। बताया की धर्मशाला 1907 में ट्रस्ट के द्वारा बनवा कर जनता को सुपूर्द कर दिया गया था। जो सभी तरह की सुख सुविधा से लैस था। चाहे स्नान घर हो, या शौचालय, या फिर ठहराव घर। सभी तरह की उत्तम  व्यवस्ता थी, जो करोड़ो रपये खर्च कर आज नही बनाया जा सकता है। आज उसकी मरम्मत या देख रेख भी बिहार सरकार से नही हो पा रहा है, और अब तो आस पास के दबंगों के द्वारा इसे खंडहर बनाने का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि 2018 में डीएम महिवाल सर के द्वारा इसका निरीक्षण किया गया था। यह वादा भी किया गया था कि इसकी बहुत जल्द जीर्णोद्वार कराया  जाएगा। लेकिन 6 साल गुजर गये। लेकिन इसमें कोई भी तरह का मरम्मती कार्य नही कराया जा सका। बल्कि मुख्य दरवाजे को रेलवे की घेराबंदी से बंद करने का कार्य जरूर हुआ है, जो ग्लानिपूर्ण है।

औरंगाबाद से दीनानाथ मौआर की रिपोर्ट