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Bihar News: खेल मैदान में धड़ाम हुए पूर्व सांसद, बैडमिंटन कोर्ट में शॉट चूक गए, मतपेटी में शॉट मिस तो नहीं करेगा!

Bihar News:उद्घाटन के दौरान जैसे ही पूर्व सांसद ने बैडमिंटन कोर्ट में शॉट लेने के लिए कदम बढ़ाया, किस्मत ने ऐसी कलाबाज़ी खाई कि उनका पैर फिसला और वे धड़ाम से जमीन पर गिर पड़े।

Bihar News: खेल मैदान में धड़ाम हुए पूर्व सांसद, बैडमिंटन को
खेल मैदान में धड़ाम हुए पूर्व सांसद- फोटो : reporter

Bihar News:औरंगाबाद के पूर्व सांसद सुशील कुमार सिंह सोमवार को सांसद खेल महोत्सव का उद्घाटन करने पहुँचे थे। माहौल उत्साह से भरा था। खिलाड़ी अपने-अपने हुनर दिखाने को तैयार थे। उद्घाटन के दौरान जैसे ही पूर्व सांसद ने बैडमिंटन कोर्ट में शॉट लेने के लिए कदम बढ़ाया, किस्मत ने ऐसी कलाबाज़ी खाई कि उनका पैर फिसला और वे धड़ाम से जमीन पर गिर पड़े।

गनीमत रही कि कोई गंभीर चोट नहीं लगी। अंगरक्षक तुरंत दौड़े और उन्हें उठाया। लोग पहले तो चौंके, फिर माहौल हल्के मज़ाक और चुटकी से भर गया। दर्शकों और विरोधियों ने फौरन तंज कस दिया –“खेल मैदान में तो धड़ाम हुए हैं, अब देखना है कि चुनावी मैदान में भी यही हाल होता है या नहीं।”

वैसे यह बात महज़ संयोग नहीं कि यह हादसा चुनावी साल में हुआ। सितंबर के अंत या अक्टूबर के पहले सप्ताह तक बिहार विधानसभा चुनाव की अधिसूचना आने की पूरी संभावना है। ऐसे में जब पूर्व सांसद खेल के मैदान में फिसल गए तो राजनीति के गलियारों में इसे चुनावी फिसलन का प्रतीक मानकर हंसी-मज़ाक का दौर शुरू हो गया।

दरअसल, चर्चा है कि पार्टी उन्हें औरंगाबाद जिले की किसी खास सीट से विधानसभा का टिकट दे सकती है। हालांकि सुशील कुमार सिंह कई बार कह चुके हैं कि “विधानसभा चुनाव लड़ने का इरादा नहीं है।” लेकिन राजनीति वही करवाती है जो पार्टी हाईकमान चाहता है। और खुद उन्होंने भी यह स्वीकार किया है कि अगर नेतृत्व आदेश देगा तो वे बतौर “समर्पित सिपाही” मैदान में उतर सकते हैं।

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यानी खेल का यह छोटा-सा हादसा अब बन गया है चुनावी चर्चाओं का तड़का। विपक्ष और जनता पूछ रही है – “बैडमिंटन कोर्ट में शॉट चूक गए, कहीं मतपेटी में भी शॉट मिस न हो जाए।”

बहरहाल, सियासत और खेल दोनों में एक ही नियम चलता है – जमीन पर गिरने से ज्यादा मायने रखते हैं फिर से उठ खड़े होने के हौसले। अब देखना यह होगा कि पूर्व सांसद खेल के मैदान में धड़ाम से गिरे, लेकिन चुनावी अखाड़े में वे संभलते हैं या सच में फिसल जाते हैं।

रिपोर्ट- दीनानाथ मौआर