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भरत तिवारी एनकाउंटर, सोशल मीडिया से 8 वीडियो गायब, खाकी पर साक्ष्यों की लीपापोती का संगीन इल्जाम

Bharat Tiwari: भरत तिवारी एनकाउंटर कांड में एक बार फिर सनसनीखेज मोड़ आ गया है। ...

Bharat Tiwari Case 8 Videos Deleted from Social Media Accoun
सोशल मीडिया से 8 वीडियो गायब- फोटो : reporter

Bharat Tiwari: भरत तिवारी एनकाउंटर कांड में एक बार फिर सनसनीखेज मोड़ आ गया है। इस मर्डर मिस्ट्री में अब डिजिटल सबूतों को लेकर शह और मात का खेल शुरू हो चुका है। भरत तिवारी के परिजनों ने पुलिस महकमे पर बेहद संगीन आरोप मढ़ते हुए दावा किया है कि मृतक के सोशल मीडिया अकाउंट से एनकाउंटर की हकीकत बयां करने वाले 8 बेहद अहम और पुख्ता वीडियो डिटेक्टिव स्टाइल में डिलीट कर दिए गए हैं।

भरत तिवारी के छोटे भाई चंदन तिवारी ने सीधे तौर पर साक्ष्यों से छेड़छाड़  का अंदेशा जताया है। चंदन का कहना है कि फेसबुक लाइव के वो 8 वीडियो इस पूरे एनकाउंटर की कहानी का रुख मोड़ सकते थे। गनीमत रही कि हमने उन मुकम्मल सबूतों को पहले ही डाउनलोड कर महफूज़ रख लिया था,वरना सिस्टम तो इस गुनाह के निशान को मिटाने पर आमादा था।

तिवारी परिवार ने इस पूरे प्रकरण में ऊंची पहुंच वाले सफेदपोशों और पुलिस की मिलीभगत का अंदेशा जताते हुए आलाधिकारियों से निष्पक्ष तफ्तीश की गुहार लगाई है।

दूसरी तरफ, इन तीखे आरोपों पर महकमे ने फौरन डैमेज कंट्रोल शुरू कर दिया है। भोजपुर के पुलिस कप्तान राज ने इन तमाम आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे महज एक अफवाह और मनगढ़ंत कहानी करार दिया है। एसपी ने साफ लफ्जों में कहा कि मकतूल का मोबाइल फोन पूरी तरह महफूज़ है और उसे फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी जांच के लिए भेजा गया है। पुलिसिया दलील है कि जब फोन सरकारी कस्टडी में है, तो सोशल मीडिया से डेटा गायब होने का सवाल ही पैदा नहीं होता।

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इस बीच, मामले की आंच न्यायिक जांच आयोग तक पहुंच चुकी है। बुधवार को अदालत की दहलीज पर दो चश्मदीद महिला गवाहों के बयानात दर्ज कराए गए, जिसके बाद माहौल और गरमा गया।एक महिला चश्मदीद ने कोर्ट रूम से निकलते ही सनसनीखेज आरोप लगाया कि जब वह घटनास्थल का आंखों देखा हाल बयां कर रही थी, तो जज साहब ने उसे बीच में ही टोककर खामोश करने की कोशिश की।

अदालत से लेकर सोशल मीडिया तक फैली यह आग अब क्या रुख अख्तियार करेगी, यह तो फॉरेंसिक रिपोर्ट और कोर्ट की अगली जिरह के बाद ही साफ हो पाएगा। फिलहाल, आरा का यह एनकाउंटर केस कानून, कत्ल और साजिश के त्रिकोण में उलझ चुका है।

रिपोर्ट- प्रांजलि सिन्हा