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केदारनाथ धाम के लिए डबल कनेक्टिविटी: रोपवे और टनल का मास्टर प्लान

केदारनाथ धाम आने वाले श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए सरकार डबल कनेक्टिविटी पर काम कर रही है. चौमासी से सोनप्रयाग तक सात किलोमीटर लंबी टनल बनाने की योजना है, जिसे केदारनाथ रोपवे परियोजना से जोड़ा जाएगा.

केदारनाथ धाम के लिए डबल कनेक्टिविटी: रोपवे और टनल का मास्टर
केदारनाथ धाम के लिए डबल कनेक्टिविटी: रोपवे और टनल का मास्टर प्लान- फोटो : News 4 Nation

बाबा केदारनाथ के दर्शन के लिए उमड़ने वाली श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए केंद्र और उत्तराखंड सरकार ने 'डबल कनेक्टिविटी' मॉडल पर काम शुरू कर दिया है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य यात्रा को न केवल सुगम बनाना है, बल्कि भविष्य की जरूरतों के अनुसार एक मजबूत बुनियादी ढांचा तैयार करना है। सरकार सोनप्रयाग से केदारनाथ धाम तक रोपवे के साथ-साथ अब एक आधुनिक सुरंग (टनल) के निर्माण पर भी फोकस कर रही है, ताकि भक्तों को सड़क और हवाई (रोपवे) दोनों तरह के बेहतर विकल्प मिल सकें।

7 किलोमीटर लंबी टनल से सुरक्षित होगा सफर

सरकार की सबसे महत्वपूर्ण योजनाओं में से एक कालीमठ के पास चौमासी से सोनप्रयाग तक बनने वाली नई सुरंग है। केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के तहत बनने वाली यह लगभग 7 किलोमीटर लंबी ट्विन ट्यूब टनल होगी। इस टनल के निर्माण से सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि यात्रियों को कुंड से सोनप्रयाग तक पहुंचने के लिए दो वैकल्पिक मार्ग मिल जाएंगे। साथ ही, यह टनल यात्रा मार्ग को भूस्खलन और खराब मौसम के जोखिम से बचाकर सफर को काफी हद तक सुरक्षित बना देगी।

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सोनप्रयाग से केदारनाथ धाम तक रोपवे का निर्माण

सोनप्रयाग से केदारनाथ धाम तक के पैदल और कठिन चढ़ाई वाले रास्ते को आसान बनाने के लिए रोपवे परियोजना पर काम तेजी से चल रहा है। वर्तमान में इस प्रोजेक्ट का सर्वे और एलाइनमेंट का कार्य जारी है और उम्मीद जताई जा रही है कि अगले 4-5 वर्षों में यह धरातल पर उतर जाएगा। रोपवे के शुरू होने से न केवल यात्रा के समय में भारी बचत होगी, बल्कि बुजुर्गों, बच्चों और दिव्यांग श्रद्धालुओं के लिए बाबा के दरबार तक पहुंचना बेहद आसान हो जाएगा।

पर्यटन और स्थानीय कनेक्टिविटी को मिलेगा नया आयाम

लोक निर्माण विभाग मंत्री सतपाल महाराज और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के प्रयासों से इस परियोजना को केंद्र से भी हरी झंडी मिल चुकी है। इन बड़ी ढांचागत सुविधाओं के विकसित होने से केदारघाटी में पर्यटन को नया बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर खुलेंगे। सरकार का मानना है कि इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद केदारनाथ यात्रा न केवल सुगम होगी, बल्कि किसी भी आपात स्थिति में यात्रियों को सुरक्षित निकालने के लिए एक अतिरिक्त और मजबूत मार्ग भी हमेशा उपलब्ध रहेगा।

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