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IAS News: फिर पॉवर में लौटेंगे 'घूस' के आरोपी अधिकारी? IAS अभिषेक प्रकाश का निलंबन खत्म, फिर संभालेंगे जिम्मेदारी !

IAS News: रिश्वतखोरी के मामले में निलंबित किए गए आईएएस अभिषेक प्रकाश के लिए राहत भरी खबर है। सरकार ने उनके निलंबन को तत्काल प्रभाव से खत्म करने का फैसला लिया है। माना जा रहा है कि जल्द ही सरकार उनकी एक बार फिर बहाली कर सकती है।

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आईएएस अधिकारी का खत्म होगा निलंबन - फोटो : social media

IAS News:  प्रशासनिक गलियारे से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। रिश्वत के गंभीर आरोपों में घिरे और लंबे समय से निलंबित चल रहे आईएएस अधिकारी अभिषेक प्रकाश की एक बार फिर बहाली हो सकती है। जिस अधिकारी पर भ्रष्टाचार के दाग लगे थे, उनका निलंबन वापस लेने के सरकार के फैसले ने सबको चौंका दिया है। हालांकि फिलहाल इसको लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। सूत्रों की मानें तो 14 मार्च से बहाली प्रभावी मानी जाएगी। 

खत्म होगा निलंबन 

दरअसल, उत्तर प्रदेश सरकार ने निलंबित आईएएस अधिकारी अभिषेक प्रकाश को बहाल करने का फैसला किया है। इन्वेस्ट यूपी के पूर्व सीईओ और 2006 बैच के आईएएस अधिकारी अभिषेक प्रकाश को सोलर कंपनी से प्रोजेक्ट मंजूरी के बदले रिश्वत मांगने के आरोप में निलंबित किया गया था। योगी सरकार ने 20 मार्च 2025 को उन्हें निलंबित कर दिया था। बाद में फरवरी 2026 में हाईकोर्ट ने साक्ष्यों के अभाव में उनके खिलाफ दाखिल चार्जशीट को रद्द कर दिया।

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रिश्वत मामले में हुए थे निलंबित 

जानकारी अनुसार निलंबन का एक वर्ष पूरा होने से पहले इस मामले की रिपोर्ट कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग को भेजना आवश्यक होता है। चूंकि जांच में आरोप सिद्ध नहीं हो पाए, इसलिए यह निर्णय लिया जाना था कि उन्हें निलंबित रखा जाए या सेवा में बहाल किया जाए। नियमानुसार इस संबंध में 14 दिन पहले डीओपीटी को भी सूचना देनी होती है। बताया जा रहा है कि इसी आधार पर उच्च स्तर से अनुमति मांगी गई थी, जिसमें उनकी बहाली पर सहमति बन गई है।

क्या था पूरा मामला 

बता दें कि, रिश्वत मांगने के आरोप में 20 मार्च 2025 को गोमती नगर थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी। यह मामला एक कंपनी के प्रतिनिधि द्वारा मुख्यमंत्री को भेजी गई शिकायत पर आधारित था। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि सोलर मैन्युफैक्चरिंग प्रोजेक्ट की मंजूरी के बदले परियोजना लागत का पांच प्रतिशत रिश्वत मांगी गई थी। मामले की सुनवाई के दौरान अभिषेक प्रकाश की ओर से दलील दी गई कि आरोप अस्पष्ट और साक्ष्यहीन हैं तथा यह कारोबारी प्रतिस्पर्धा और प्रशासनिक भ्रम का परिणाम है। 

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कोर्ट ने साक्ष्य के अभाव में रद्द किया चार्जशीट 

वहीं अदालत में यह भी कहा गया कि न तो कोई धनराशि दी गई और न ही किसी प्रकार की संपत्ति या मूल्यवान वस्तु का लेनदेन हुआ। साथ ही किसी प्रकार की धमकी दिए जाने का भी कोई प्रमाण सामने नहीं आया। जांच के दौरान कथित एक करोड़ रुपये नकद की कोई बरामदगी भी नहीं हुई और न ही घटनास्थल का नक्शा तैयार किया गया। अदालत ने भी माना कि रिकॉर्ड पर ऐसा कोई ठोस साक्ष्य नहीं है जिससे यह साबित हो सके कि किसी लोक सेवक को अनुचित लाभ देने की पेशकश की गई थी। इसी आधार पर चार्जशीट को रद्द करते हुए अधिकारी की बहाली का रास्ता साफ हो गया।