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Central Education Minister : धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय की कमान, जानिए उनकी राजनीतिक यात्रा, ये है सबसे बड़ी अग्निपरीक्षा

Central Education Minister :धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद केंद्र सरकार ने शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी को सौंप दी गई है।

Prahlad Joshi Gets Education Ministry Charge
प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय की कमान- फोटो : reporter

 Central Education Minister : देशभर में सीजेपी के नेतृत्व में हुए छात्र आंदोलन और पेपर लीक विवाद के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद केंद्र सरकार ने शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी को सौंप दी है। राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद प्रह्लाद जोशी को उनके मौजूदा मंत्रालयों के साथ-साथ शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है।अब प्रह्लाद जोशी उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के साथ-साथ देश के सबसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों में से एक शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी भी संभालेंगे। धर्मेंद्र प्रधान के कार्यकाल में NEET पेपर लीक, परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता और राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली को लेकर लगातार सवाल उठते रहे थे। ऐसे समय में शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी संभालना प्रह्लाद जोशी के लिए बड़ी राजनीतिक और प्रशासनिक परीक्षा मानी जा रही है।

कौन हैं प्रह्लाद जोशी?

केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी का जन्म 27 नवंबर 1962 को कर्नाटक के विजयपुर में हुआ था। वह भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में शामिल हैं और लंबे समय से राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय हैं। वह कर्नाटक के धारवाड़ लोकसभा क्षेत्र से वर्ष 2004 से लगातार सांसद रहे हैं।उनके पिता वेंकटेश जोशी भारतीय रेलवे में कर्मचारी थे। प्रह्लाद जोशी ने अपनी शुरुआती शिक्षा रेलवे स्कूल और न्यू इंग्लिश स्कूल, हुबली से प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने कर्नाटक यूनिवर्सिटी, धारवाड़ के केएस आर्ट्स कॉलेज से बीए की पढ़ाई की। शिक्षा पूरी करने के बाद वह सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों से जुड़ गए।

प्रह्लाद जोशी केंद्र सरकार में पहले भी कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं। संगठन और सरकार दोनों स्तरों पर उनका लंबा अनुभव रहा है। उनकी छवि बीजेपी के अनुभवी और संगठनात्मक पकड़ रखने वाले नेताओं में होती है।

शिक्षा मंत्रालय का इतिहास और चुनौती

मोदी सरकार में धर्मेंद्र प्रधान लगभग 1,845 दिनों तक शिक्षा मंत्री रहे, जो पिछले एक दशक में किसी शिक्षा मंत्री का सबसे लंबा कार्यकाल रहा है। इससे पहले प्रकाश जावड़ेकर करीब 1,059 दिन, स्मृति ईरानी करीब 771 दिन और रमेश पोखरियाल निशंक करीब 769 दिन तक इस पद पर रहे।शिक्षा मंत्रालय पिछले कुछ वर्षों में लगातार चुनौतियों से घिरा रहा है। नई शिक्षा नीति 2020 को लागू करना, प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता बनाए रखना और शिक्षा व्यवस्था में तकनीकी सुधार जैसे कई बड़े मुद्दे सरकार के सामने हैं।

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NEET विवाद और परीक्षा व्यवस्था होगी सबसे बड़ी अग्निपरीक्षा

प्रह्लाद जोशी के सामने सबसे बड़ी चुनौती NEET समेत अन्य राष्ट्रीय परीक्षाओं की विश्वसनीयता बहाल करना होगी। पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ी के आरोपों ने लाखों छात्रों के भविष्य पर सवाल खड़े किए हैं।इसके अलावा उन्हें राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली में सुधार, परीक्षा सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और छात्रों के भरोसे को वापस लाने की चुनौती होगी।

नई शिक्षा नीति से लेकर CBSE-NCERT तक सुधार की चुनौती

शिक्षा मंत्रालय के सामने नई शिक्षा नीति को जमीन पर प्रभावी तरीके से लागू करना भी बड़ा एजेंडा होगा। पाठ्यक्रम में बदलाव, CBSE और NCERT में सुधार, उच्च शिक्षा संस्थानों की गुणवत्ता बढ़ाना और लंबित सुधारों को गति देना नए शिक्षा मंत्री की प्राथमिकताओं में शामिल रहेगा।

प्रह्लाद जोशी के सामने अब सिर्फ मंत्रालय चलाने की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में भरोसा कायम करने की चुनौती भी है। छात्र आंदोलन और परीक्षा विवाद के बाद शिक्षा मंत्रालय की साख को मजबूत करना उनकी सबसे बड़ी राजनीतिक परीक्षा होगी।