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'15 मिनट में उतर गया बुखार…' कौन हैं प्रो. वी. कामकोटि का क्या था विवादित बयान जिस कारण प्रियंका गांधी ने कहा- गौमूत्र विशेषज्ञ

प्रो. कामकोटि का वर्ष 2025 में गौमूत्र पर आए बयान के बाद कांग्रेस, डीएमके समेत कई विपक्षी दलों ने इसकी आलोचना की थी। कई चिकित्सकों और वैज्ञानिकों ने भी कहा कि इन दावों के समर्थन में व्यापक और निर्णायक वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं

IIT Madras Director V Kamakoti
IIT Madras Director V Kamakoti- फोटो : news4nation

Priyanka Gandhi :  लोकसभा में एंटी-पेपर लीक विधेयक पर चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा की एक टिप्पणी के बाद आईआईटी मद्रास के निदेशक प्रो. वी. कामकोटि एक बार फिर चर्चा में आ गए हैं। प्रियंका गांधी ने राधाकृष्णन समिति का जिक्र करते हुए उन्हें "गौमूत्र विशेषज्ञ" बताया, जिस पर सत्ता पक्ष ने कड़ी आपत्ति जताई और सदन में हंगामा हो गया। इसके बाद प्रो. कामकोटि का जनवरी 2025 का एक पुराना बयान फिर सुर्खियों में आ गया।

कौन हैं प्रो. वी. कामकोटि?

प्रो. वी. कामकोटि देश के प्रतिष्ठित शिक्षाविद और कंप्यूटर विज्ञान के विशेषज्ञ हैं। वह भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) मद्रास के निदेशक हैं और कंप्यूटर आर्किटेक्चर, साइबर सुरक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) तथा भारतीय भाषा कंप्यूटिंग के क्षेत्र में उनके शोध कार्यों को व्यापक पहचान मिली है। शिक्षा और तकनीक के क्षेत्र में उनके योगदान के कारण केंद्र सरकार ने उन्हें कई राष्ट्रीय समितियों और उच्चस्तरीय विशेषज्ञ समूहों में भी शामिल किया है। हाल ही में गठित राधाकृष्णन समिति में भी उन्हें सदस्य बनाया गया है, जो परीक्षा प्रणाली में सुधार और पेपर लीक जैसी घटनाओं की रोकथाम के लिए सुझाव दे रही है।

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क्या था विवादित बयान?

जनवरी 2025 में चेन्नई में आयोजित एक गो-संरक्षण कार्यक्रम के दौरान प्रो. कामकोटि ने भारतीय पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों का उल्लेख करते हुए गौमूत्र के कथित औषधीय गुणों पर टिप्पणी की थी। उन्होंने एक संन्यासी का उदाहरण देते हुए कहा था कि तेज बुखार होने पर संन्यासी ने डॉक्टर बुलाने के बजाय गौमूत्र का सेवन किया और करीब 15 मिनट के भीतर उनका बुखार उतर गया। उन्होंने यह भी कहा था कि गौमूत्र में एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-फंगल और पाचन संबंधी गुण होने की बात कुछ अध्ययनों में कही गई है तथा इरिटेबल बाउल सिंड्रोम (IBS) जैसी समस्याओं में इसके संभावित उपयोग पर भी शोध हुए हैं। साथ ही उन्होंने इस विषय पर वैज्ञानिक अध्ययन और चर्चा की आवश्यकता पर जोर दिया था।

बयान पर क्यों हुआ विवाद?

प्रो. कामकोटि के बयान के सामने आने के बाद कांग्रेस, डीएमके समेत कई विपक्षी दलों ने इसकी आलोचना की। कई चिकित्सकों और वैज्ञानिकों ने भी कहा कि इन दावों के समर्थन में व्यापक और निर्णायक वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं, इसलिए इन्हें स्थापित चिकित्सा तथ्य के रूप में पेश नहीं किया जाना चाहिए।

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विवाद बढ़ने पर प्रो. कामकोटि ने सफाई देते हुए कहा कि उनका उद्देश्य किसी तरह का अंधविश्वास फैलाना नहीं था। उन्होंने कहा कि उन्होंने भारतीय पारंपरिक ज्ञान और उपलब्ध शोधों का उल्लेख किया था तथा गौमूत्र से जुड़े कुछ वैज्ञानिक अध्ययन और पेटेंट भी मौजूद हैं, जिन पर आगे शोध होना चाहिए।

संसद में फिर क्यों उठा मुद्दा?

नीट पेपर लीक और परीक्षा सुधार पर चर्चा के दौरान प्रियंका गांधी वाड्रा ने राधाकृष्णन समिति का जिक्र करते हुए प्रो. कामकोटि पर तंज कसा। इस टिप्पणी के बाद भाजपा सांसदों ने इसे एक प्रतिष्ठित वैज्ञानिक और शिक्षाविद का अपमान बताया। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने भी इस पर आपत्ति जताई, जिसके बाद लोकसभा में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। इस तरह डेढ़ वर्ष पुराना बयान एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में आ गया है।